Uniform Civil Code: UCC को लेकर देश में तेज हुई चर्चा, 21 राज्यों में लागू करने की तैयारी; जानें क्या है पूरा मामला
21 राज्यों में लागू करने की तैयारी, जानें क्या है समान नागरिक संहिता

भारत में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इस बयान के बाद अलग-अलग राज्यों और NDA के सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

क्या है समान नागरिक संहिता यानी UCC?
समान नागरिक संहिता का मतलब ऐसे समान नागरिक कानूनों से है, जो धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराएं। इसके तहत आम तौर पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों की चर्चा होती है।
भारत में फिलहाल इन विषयों से जुड़े कई व्यक्तिगत कानून अलग-अलग धार्मिक समुदायों पर लागू होते हैं। UCC की बहस का एक प्रमुख पहलू यह है कि नागरिक मामलों में सभी के लिए समान नियम होने चाहिए या धार्मिक एवं सामुदायिक व्यक्तिगत कानूनों को अलग-अलग बनाए रखा जाना चाहिए।
2029 से पहले 21 राज्यों का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सितंबर 2026 में कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA के शासन वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ राज्यों में UCC को लेकर कानून और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पहले से चल रही हैं।
इस घोषणा के बाद UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में इसके लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और अंतिम प्रावधान राज्य की परिस्थितियों तथा संबंधित कानून पर निर्भर करेंगे।
उत्तराखंड में पहले से लागू है UCC
UCC के मामले में उत्तराखंड देश का प्रमुख उदाहरण है। राज्य में समान नागरिक संहिता लागू है और इसके तहत विवाह पंजीकरण समेत कई नागरिक सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक UCC पोर्टल पर 2026 में भी UCC से जुड़े संशोधन और सरकारी आदेश उपलब्ध हैं।
उत्तराखंड मॉडल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, राज्य के UCC के प्रावधानों को दूसरे राज्यों में उसी रूप में लागू किया जाएगा या नहीं, यह अलग-अलग विधायी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
बिहार में सामने आया अलग रुख
UCC को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम के कारण भी हुई है। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में UCC विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसके लागू होने का विरोध करेगी। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करने की बात कही है।
वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से मसौदा सामने आने और संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद रुख तय करने की बात कही गई है। यानी NDA के भीतर भी UCC को लेकर सभी सहयोगी दलों की स्थिति एक जैसी नहीं है।
अन्य सहयोगी दलों का क्या रुख है?
UCC पर NDA के अलग-अलग सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। TDP, शिवसेना और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने प्रस्ताव का समर्थन किया है, जबकि कुछ दलों ने विस्तृत चर्चा और मसौदा देखने की जरूरत बताई है। TDP ने भी कहा है कि संबंधित पक्षों को चर्चा में शामिल किया जाएगा।
इससे साफ है कि UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया चल रही है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
UCC पर संविधान क्या कहता है?
समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है। यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और इसमें राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की अपेक्षा की गई है।
हालांकि, अनुच्छेद 44 अपने आप में किसी तत्काल राष्ट्रीय UCC कानून को लागू नहीं करता। किसी राज्य में UCC लागू करने के लिए संबंधित विधायी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
आगे क्या होगा?
अब UCC को लेकर अगला महत्वपूर्ण चरण अलग-अलग राज्यों में प्रस्तावित कानून, मसौदे और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। जहां राज्य सरकारें आगे बढ़ती हैं, वहां विधानसभा की प्रक्रिया और कानून लागू करने से जुड़े नियम महत्वपूर्ण होंगे।
दूसरी ओर, जिन राज्यों में सहयोगी दल या अन्य राजनीतिक समूह व्यापक चर्चा की मांग कर रहे हैं, वहां मसौदा, कानूनी प्रावधान और हितधारकों से परामर्श आगे की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।
UCC को लेकर 5 बड़ी बातें
- UCC का मतलब: समान नागरिक संहिता।
- मुख्य विषय: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और अन्य व्यक्तिगत नागरिक मामले।
- केंद्र की घोषणा: 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में लागू करने की बात।
- पहला प्रमुख राज्य: उत्तराखंड में UCC लागू है।
- वर्तमान स्थिति: सभी 21 राज्यों में UCC लागू नहीं हुआ है; राज्यों में प्रक्रिया और राजनीतिक रुख अलग-अलग हैं।
निष्कर्ष: UCC को लेकर देश में चर्चा अब केवल राष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य स्तर पर कानून, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक सहमति का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले समय में प्रस्तावित मसौदों और राज्यों की कार्रवाई से इसकी दिशा और स्पष्ट होगी।



