पंडवानी की अमर आवाज़ हुई खामोश, पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन; भारतीय लोककला जगत को बड़ी क्षति
पंडवानी की अमर आवाज़ हुई खामोश: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, लोककला जगत को अपूरणीय क्षति

भारतीय लोककला की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में शामिल पद्म विभूषण सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने रायपुर के एम्स में अंतिम सांस ली। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज़, अनूठी प्रस्तुति और अभिनय शैली के दम पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उन्हें भारत की लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राष्ट्रीय नेताओं और कलाकारों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे भारतीय कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया।
कौन थीं तीजन बाई?
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी और उस समय की सामाजिक परंपराओं को चुनौती देते हुए पुरुष प्रधान मानी जाने वाली कपालिक शैली में पंडवानी प्रस्तुत की। यही उनकी पहचान बन गई।
पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान
पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला है, जिसमें महाभारत की कथाओं को गायन, अभिनय और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
तीजन बाई ने इस लोककला को गांवों की चौपाल से निकालकर देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों में प्रस्तुतियां दीं और भारतीय लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया।
संघर्षों से भरा रहा जीवन
तीजन बाई का जीवन आसान नहीं था। कम उम्र में उनका विवाह हो गया, लेकिन पंडवानी गाने के कारण उन्हें सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा। कई कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी कला नहीं छोड़ी और लगातार आगे बढ़ती रहीं।
उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और प्रतिभा ने उन्हें देश की सबसे सम्मानित लोक कलाकारों में शामिल कर दिया।
मिले देश के सर्वोच्च सम्मान
भारतीय लोककला में असाधारण योगदान के लिए तीजन बाई को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख हैं—
- पद्म श्री
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- पद्म भूषण
- पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)
इन सम्मानों ने उनके दशकों लंबे सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई।
नेताओं और कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी भव्य प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोककला को पूरी दुनिया में अलग पहचान दिलाई। उन्होंने उनके निधन को कला और संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति बताया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कई नेताओं और सांस्कृतिक हस्तियों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
रायपुर और दुर्ग में उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान कलाकारों और प्रशंसकों ने पारंपरिक गीत गाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूरा माहौल भावुक हो गया और लोगों ने उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा बताया।
भारतीय संस्कृति के लिए क्यों बड़ी क्षति?
तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा की जीवंत पहचान थीं। उन्होंने नई पीढ़ी को पंडवानी से जोड़ा और यह साबित किया कि लोककला भी विश्व मंच पर सम्मान प्राप्त कर सकती है। उनका निधन भारतीय लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
निष्कर्ष
तीजन बाई का जाना भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उन्होंने अपनी अद्भुत कला, संघर्ष और समर्पण से पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई और करोड़ों लोगों के दिलों में अमिट स्थान बनाया। उनकी आवाज़ भले ही अब खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

