UP Weather Update: बारिश और बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता, नदियों के किनारे कटान का खतरा
यूपी में बारिश और बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता, नदियों के किनारे कटान का खतरा

उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश के दौर के बीच कई जिलों में बाढ़ और नदी कटान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। सितंबर की शुरुआत में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति बनी थी। राहत विभाग के अनुसार, 26 जिलों में करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।

नदियों का बढ़ा जलस्तर, कटान से बढ़ी परेशानी
बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा, सरयू, शारदा, घाघरा और रामगंगा जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई नदी किनारे के इलाकों में तेज बहाव के कारण जमीन कटने की समस्या भी सामने आई। फर्रुखाबाद में गंगा के तेज बहाव से कई मकानों और झोपड़ियों के बहने की रिपोर्ट सामने आई थी।
कटान की वजह से नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों के सामने घर और खेत बचाने की चुनौती बनी हुई है। कई जगह ग्रामीण तटबंधों और नदी किनारों को मजबूत करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास करते नजर आए।
पूर्वांचल और तराई के इलाकों में भी असर
गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में राप्ती और रोहिन नदियों के जलस्तर में वृद्धि से नदी किनारे के इलाकों में कटान और जलभराव का खतरा बढ़ा। कुछ स्थानों पर नदी के तेज बहाव से पेड़ और मिट्टी नदी में समाने की स्थिति भी सामने आई।
इसी तरह प्रदेश के अन्य बाढ़ प्रभावित जिलों में भी प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाए गए। सितंबर की शुरुआत में प्रभावित क्षेत्रों में नावों और मोटरबोट के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया था।
31 जिलों में बारिश का अलर्ट कब जारी हुआ था?
31 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जुलाई 2026 में जारी किया गया था। उस समय मौसम विभाग के पूर्वानुमान में बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, बाराबंकी, अयोध्या, गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, वाराणसी, सोनभद्र और चंदौली समेत 31 जिलों को शामिल किया गया था।
उस दौर में भारी बारिश के साथ जलभराव, बिजली गिरने और नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका भी जताई गई थी।
अभी कैसा है यूपी का मौसम?
19 सितंबर 2026 को जारी IMD के सब-डिविजन वार्निंग बुलेटिन में पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई चेतावनी नहीं है। यानी मौजूदा आधिकारिक पूर्वानुमान में राज्य के दोनों मौसम उपखंडों के लिए अगले सात दिनों में भारी बारिश का अलर्ट दर्ज नहीं किया गया है।
हालांकि, नदी किनारे और पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलस्तर और कटान की स्थानीय स्थिति अलग-अलग हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासन के स्थानीय अपडेट और नदी के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
नदी के किनारे कटान वाले क्षेत्रों में लोगों को कमजोर तटबंधों और कटे हुए किनारों के पास जाने से बचना चाहिए। बच्चों और पशुओं को नदी के पास न जाने देने की सलाह दी जाती है। जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाते समय भी विशेष सावधानी जरूरी है।
UP Weather Update: मुख्य बातें
- यूपी में हाल के दिनों में कई इलाकों में बारिश और बाढ़ का असर रहा।
- गंगा, सरयू, शारदा, घाघरा और रामगंगा जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा था।
- नदी किनारे के कई क्षेत्रों में जमीन कटने की समस्या सामने आई।
- सितंबर की शुरुआत में 26 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे।
- 19 सितंबर के IMD बुलेटिन में पूर्वी और पश्चिमी यूपी के लिए कोई मौजूदा चेतावनी नहीं है।


