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अरुणाचल प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया ड्री फेस्टिवल, पारंपरिक संस्कृति और लोक विरासत का दिखा भव्य नजारा

अरुणाचल प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया ड्री (Dree) फेस्टिवल, पारंपरिक संस्कृति और कृषि परंपरा का दिखा अनूठा संगम

अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध जीरो वैली (Ziro Valley) में अपातानी (Apatani) समुदाय ने पारंपरिक उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ ड्री (Dree) फेस्टिवल 2026 मनाया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, लोकनृत्य, धार्मिक अनुष्ठानों और सामुदायिक आयोजनों के बीच हजारों लोगों ने इस ऐतिहासिक कृषि पर्व में भाग लिया। इस वर्ष का आयोजन पहले की तुलना में और अधिक भव्य रहा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खेल प्रतियोगिताएं, फैशन शो और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

क्या है ड्री फेस्टिवल?

ड्री फेस्टिवल अरुणाचल प्रदेश के अपातानी जनजाति का सबसे प्रमुख कृषि और सांस्कृतिक पर्व है। यह हर वर्ष 5 जुलाई को मनाया जाता है और अच्छी फसल, समय पर वर्षा, भूमि की उर्वरता तथा समाज की खुशहाली के लिए देवी-देवताओं से प्रार्थना की जाती है। यह पर्व अपातानी समुदाय की प्रकृति और खेती से गहरे जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

जीरो वैली में दिखी सांस्कृतिक झलक

इस वर्ष ड्री फेस्टिवल का सबसे बड़ा आयोजन जीरो वैली में हुआ, जहां हजारों स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन, लोकगीत, सामूहिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंग दिया।

महिलाएं और पुरुष पारंपरिक अपातानी पोशाक में नजर आए, जबकि युवाओं ने भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को उत्साह के साथ प्रस्तुत किया।

धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व

ड्री फेस्टिवल के दौरान अपातानी समुदाय विशेष पूजा-अर्चना करता है। इस अवसर पर अच्छी फसल, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा, कीटों से बचाव और पूरे समाज की समृद्धि के लिए पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

मान्यता है कि इन धार्मिक अनुष्ठानों से खेती में समृद्धि आती है और समुदाय का कल्याण होता है।

मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ड्री फेस्टिवल के अवसर पर राज्यवासियों, विशेषकर अपातानी समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल कृषि से जुड़ा उत्सव नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

संस्कृति और आधुनिकता का संगम

इस बार ड्री फेस्टिवल में पारंपरिक आयोजनों के साथ-साथ कई आधुनिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इनमें—

  • लोक नृत्य प्रतियोगिता
  • सांस्कृतिक संध्या
  • खेल प्रतियोगिताएं
  • फैशन शो
  • छात्रों का सम्मान समारोह
  • स्थानीय हस्तशिल्प और व्यंजनों की प्रदर्शनी

शामिल रहे। इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और स्थानीय कला को बढ़ावा देना था।

पर्यटन को भी मिला बढ़ावा

ड्री फेस्टिवल के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक जीरो वैली पहुंचे। प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिलने के कारण यह पर्व पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की थीं।

क्यों खास है ड्री फेस्टिवल?

ड्री फेस्टिवल की विशेषताएं—

  • अपातानी जनजाति का सबसे बड़ा कृषि पर्व।
  • अच्छी फसल और समृद्धि की कामना।
  • प्रकृति संरक्षण और पारंपरिक खेती का संदेश।
  • लोक संस्कृति और जनजातीय विरासत का प्रदर्शन।
  • पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।

निष्कर्ष

अरुणाचल प्रदेश का ड्री फेस्टिवल केवल एक धार्मिक या कृषि पर्व नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। जीरो वैली में आयोजित इस वर्ष के भव्य समारोह ने एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

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