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जिबूती तट पर नाव पलटी: 139 प्रवासियों की मौत, 84 लापता; 15 बच्चों की भी गई जान, यमन जा रहे थे 305 लोग

जिबूती तट पर नाव हादसा: 139 की मौत, 84 लापता; 15 बच्चे भी मृतकों में शामिल

अफ्रीकी देश जिबूती के तट के पास प्रवासियों से भरी एक नाव पलटने से भीषण हादसा हो गया। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संस्था (IOM) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हादसे में कम से कम 139 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 84 लोग अब भी लापता हैं। मृतकों में 15 बच्चे भी शामिल हैं। नाव में कुल 305 लोग सवार थे और वे जिबूती से यमन की ओर जा रहे थे। हादसे के बाद समुद्र में लापता लोगों की तलाश जारी है।

05 यात्रियों से भरी नाव समुद्र में पलटी

रिपोर्टों के मुताबिक, यह हादसा 8 और 9 अक्टूबर की रात गुहेरे इलाके के पास हुआ, जो जिबूती के ओबॉक शहर के उत्तर में स्थित है। नाव बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होते हुए यमन की ओर जा रही थी। जीवित बचे लोगों के बयानों के आधार पर हादसे की जानकारी सामने आई है।

IOM के अनुसार, अब तक 82 लोगों के जीवित बचने की पुष्टि हुई है। सभी बचाए गए लोग इथियोपिया के नागरिक बताए गए हैं। मृतकों की संख्या शुरुआती रिपोर्टों में 109 बताई गई थी, लेकिन बाद में जारी अपडेट में यह आंकड़ा बढ़कर 139 हो गया। इसलिए शुरुआती आंकड़ों के बजाय ताजा संख्या को ध्यान में रखना जरूरी है।

15 बच्चों समेत 139 लोगों की मौत

हादसे में जान गंवाने वालों में 52 पुरुष, 42 महिलाएं और 15 बच्चे शामिल हैं। बच्चों में नौ लड़कियां और छह लड़के बताए गए हैं। 84 लोग लापता हैं, जबकि 82 यात्रियों के बचने की जानकारी मिली है। जिबूती के स्थानीय अधिकारी बचाव अभियान चला रहे हैं और मृतकों के शवों को निकालने की कार्रवाई जारी है।

IOM की टीमें भी घटनास्थल पर स्थानीय प्रशासन की सहायता कर रही हैं। जीवित बचे लोगों को चिकित्सा सुविधा, भोजन और मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। संस्था ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि यह हादसा प्रवासियों के सामने मौजूद गंभीर जोखिमों को उजागर करता है।

बेहतर जीवन की तलाश में खतरनाक समुद्री यात्रा

अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र से हर साल बड़ी संख्या में लोग रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में यमन होते हुए खाड़ी देशों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इसके लिए उन्हें बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार करना पड़ता है। यह समुद्री रास्ता अपने संकरे हिस्से में लगभग 20 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन छोटी और क्षमता से अधिक भरी नावों में यात्रा करना बेहद जोखिम भरा है।

गरीबी, असुरक्षा, प्राकृतिक आपदाओं और रोजगार की कमी के कारण लोग इन खतरनाक यात्राओं पर निकलते हैं। यमन में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद इस मार्ग पर प्रवास जारी है। IOM के मुताबिक, वर्ष 2025 में इस मार्ग पर 900 से अधिक प्रवासियों की मौत हुई या वे लापता हो गए थे।

सुरक्षित प्रवास के रास्ते उपलब्ध कराने की अपील

इस त्रासदी के बाद IOM ने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों से सुरक्षित एवं कानूनी प्रवास के विकल्प उपलब्ध कराने की अपील की है। संस्था का कहना है कि जोखिम भरी समुद्री यात्राओं में लगातार हो रही मौतों को सामान्य घटना की तरह नहीं लिया जाना चाहिए।

फिलहाल जिबूती के तट पर खोज और बचाव अभियान जारी है। लापता लोगों के परिजनों को उनके अपनों के बारे में जानकारी मिलने का इंतजार है। यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि बेहतर जीवन की उम्मीद में शुरू की गई यात्रा किस तरह बड़े मानवीय संकट में बदल सकती है।

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