उत्तर प्रदेश

UP Assembly Update: धर्मांतरण और पेपर लीक पर सख्ती, जानिए कानून और 12,209 करोड़ के बजट की पूरी कहानी

धर्मांतरण और पेपर लीक पर सख्ती, अनुपूरक बजट का पूरा अपडेट

उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मुद्दे—अवैध धर्मांतरण, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुपूरक बजट—लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। हालांकि, इन तीनों को एक ही 2026 की विधानसभा कार्रवाई के रूप में पेश करने से पहले तारीखों का ध्यान रखना जरूरी है। 12,209.93 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट जुलाई 2024 में पेश किया गया था, जबकि 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट अगस्त 2026 में 59,019.54 करोड़ रुपये का रहा।

धर्मांतरण कानून में बढ़ाई गई सजा

उत्तर प्रदेश विधानसभा ने जुलाई 2024 में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक-2024 पारित किया था। सार्वजनिक और राजनीतिक बहस में इसे अक्सर ‘लव जिहाद कानून’ कहा जाता है, लेकिन कानून का आधिकारिक विषय अवैध धर्मांतरण है। संशोधन में जबरन, धोखे या प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में सजा और जुर्माने को पहले की तुलना में कड़ा किया गया।

विशेष परिस्थितियों में, खासकर नाबालिगों, महिलाओं या अन्य संवेदनशील श्रेणियों से जुड़े मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया। धर्म परिवर्तन के लिए कथित फंडिंग को भी अपराध के दायरे में रखा गया। नाबालिग या महिला की कथित तस्करी अथवा अवैध धर्मांतरण से जुड़े कुछ गंभीर मामलों में कम से कम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान बताया गया है।

पेपर लीक पर आजीवन कारावास का प्रावधान

इसी विधानसभा कार्रवाई में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक-2024 भी पारित हुआ था। इसका उद्देश्य भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, नकल और संगठित धांधली पर लगाम लगाना है। कानून में गंभीर मामलों के लिए दो वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया।

कानून का दायरा भर्ती परीक्षाओं, पदोन्नति और नियमितीकरण से जुड़ी परीक्षाओं के अलावा डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्रों की प्रवेश परीक्षाओं तक रखा गया है। फर्जी प्रश्नपत्र बांटने और फर्जी रोजगार वेबसाइट चलाने जैसी गतिविधियों को भी दंडनीय बनाया गया। गंभीर अपराधों को गैर-जमानती रखते हुए मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में किए जाने का प्रावधान है।

12,209 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट कब आया था?

अब आते हैं 12,209.93 करोड़ रुपये के आंकड़े पर। यह राशि 2024-25 के पहले अनुपूरक बजट से संबंधित है। तत्कालीन वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जुलाई 2024 में इसे विधानसभा में पेश किया था। इसमें 4,227.94 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 7,981.99 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए रखे गए थे।

इस बजट में औद्योगिक विकास, ऊर्जा, परिवहन, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिक विकास के लिए 7,500 करोड़, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ और परिवहन विभाग के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

2026 में कितना है अनुपूरक बजट?

2026-27 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अगस्त में 59,019.54 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट पेश किया। इसमें एक्सप्रेसवे, औद्योगिक ढांचे, बिजली, निवेश प्रोत्साहन और ग्रामीण विकास समेत कई क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए।

इसलिए मौजूदा समय में यूपी विधानसभा की खबर लिखते वक्त 2024 के 12,209.93 करोड़ रुपये और 2026 के 59,019.54 करोड़ रुपये को अलग-अलग संदर्भों में रखना जरूरी है। वहीं धर्मांतरण और पेपर लीक पर कठोर सजा वाले प्रावधान 2024 के कानूनों से जुड़े हैं, जिनका प्रभाव और इस्तेमाल 2026 में भी राज्य में देखने को मिल रहा है।

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