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Vasundhara Police Chowki : सात धाराओं में केस दर्ज, धमाके के पीछे कौन निकला?

गाजियाबाद पुलिस चौकी धमाका: 7 धाराओं में FIR दर्ज, अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा, जांच में जुटीं एजेंसियां

गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में पुलिस चौकी के पीछे हुए धमाके के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना के संबंध में सात अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया है। धमाके में चौकी की दीवारों में दरारें आ गई थीं और खिड़कियों के शीशे टूट गए थे। अब जांच एजेंसियां विस्फोट के कारणों और इसके पीछे शामिल लोगों का पता लगाने में जुटी हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में वसुंधरा पुलिस चौकी के पीछे हुए विस्फोट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 की रात हुए इस धमाके के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की ओर से भारतीय न्याय संहिता (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानूनों के तहत कुल सात धाराएं लगाई गई हैं।

मामले में फिलहाल किसी व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी है। इसी वजह से एफआईआर में आरोपी के नाम के स्थान पर अज्ञात व्यक्ति का उल्लेख किया गया है।

पुलिस चौकी के पीछे अचानक हुआ जोरदार धमाका

एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, 6 नवंबर की रात वसुंधरा पुलिस चौकी के पिछले हिस्से में अचानक तेज आवाज के साथ विस्फोट हुआ। उस समय चौकी पर सब इंस्पेक्टर विकास सिंह मौजूद थे। धमाके की आवाज सुनकर पुलिसकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।

विस्फोट इतना तेज था कि चौकी के कमरों की दीवारों में दरारें पड़ गईं। पीछे बने बाथरूम और कमरों की खिड़कियों के शीशे टूटकर बिखर गए। इसके अलावा चौकी में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया।

घटना के बाद पुलिस ने तत्काल मौके का निरीक्षण किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फील्ड यूनिट और दूसरी जांच एजेंसियों को भी बुलाया गया। अधिकारियों ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए, ताकि विस्फोट की प्रकृति और इस्तेमाल किए गए संभावित विस्फोटक का पता लगाया जा सके।

सात धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने इस मामले में 7 नवंबर 2026 को शाम 5 बजकर 29 मिनट पर एफआईआर दर्ज की। शिकायत चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी की ओर से दी गई थी। इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।

एफआईआर में शामिल धाराएं इस प्रकार हैं:

  1. भारतीय न्याय संहिता की धारा 326(f)
  2. भारतीय न्याय संहिता की धारा 326(g)
  3. भारतीय न्याय संहिता की धारा 132
  4. सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3
  5. सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 4
  6. विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3
  7. विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4

इन धाराओं के तहत पुलिस विस्फोट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

धमाके की जांच में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी पहुंची

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच में दूसरी एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम भी वसुंधरा पुलिस चौकी पहुंची और घटनास्थल से जुड़ी जानकारियां जुटाईं।

जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि चौकी के पीछे धमाका किस वजह से हुआ और इसमें किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के पीछे किसी व्यक्ति की साजिश थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ी जांच एजेंसियों की सतर्कता

धमाके के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई, जिसमें ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ नाम के संगठन ने कथित तौर पर घटना की जिम्मेदारी ली है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां मामले को और गंभीरता से देख रही हैं।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह कोई नया संगठन हो सकता है, क्योंकि इससे पहले इसकी गतिविधियों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई थी। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस नाम का प्रतिबंधित संगठन ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन’ (TuM) से कोई संबंध है या नहीं।

इसके साथ ही पाकिस्तान में मौजूद गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नाम भी संभावित साजिश के संदर्भ में सामने आया है। हालांकि, इस मामले में उसकी भूमिका की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब किस दिशा में आगे बढ़ेगी जांच?

फिलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और अलग-अलग पहलुओं से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां विस्फोट के कारण, इस्तेमाल की गई सामग्री, सोशल मीडिया पर सामने आए दावे और संभावित आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।

हालांकि, अभी तक धमाके के पीछे किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने और आधिकारिक साक्ष्य सामने आने के बाद ही घटना की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी। गाजियाबाद के इस मामले पर अब स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर बनी हुई है।

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