UP Rajya Sabha Election 2026: अखिलेश यादव का बड़ा फैसला, सपा नहीं उतारेगी तीसरा उम्मीदवार; BJP के 8 और SP के 2 प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय
अखिलेश यादव नहीं उतारेंगे तीसरा उम्मीदवार, BJP की 8 और SP की 2 सीटें तय

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही सियासी हलचल अब थमती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को संकेत दिया कि पार्टी राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” उनके इस बयान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की ओर सीधे इशारे के तौर पर देखा जा रहा है।

अखिलेश यादव के इस रुख के बाद उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो गई है। अब भाजपा के 8 उम्मीदवार और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए सभी 10 प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बन गई है।
क्या है अखिलेश यादव के ‘तीन नहीं, 403’ वाले बयान का मतलब?
समाजवादी पार्टी पिछले कुछ दिनों से राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारने की संभावना पर मंथन कर रही थी। भाजपा ने जब उत्तर प्रदेश से आठ उम्मीदवारों की सूची जारी की, उसके बाद सियासी मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही थी। यहां तक कि सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की तैयारी की खबरें भी सामने आई थीं।
लेकिन 6 अक्टूबर की सुबह अखिलेश यादव की पोस्ट ने तस्वीर बदल दी। ‘तीन’ से उनका संकेत राज्यसभा की तीसरी सीट और ‘403’ से उत्तर प्रदेश की कुल विधानसभा सीटों की ओर माना जा रहा है। यानी सपा अब राज्यसभा के तत्काल मुकाबले के बजाय अपना राजनीतिक फोकस 2027 के विधानसभा चुनाव पर केंद्रित करना चाहती है।
राज्यसभा की 10 सीटों का क्या है पूरा गणित?
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव निर्धारित है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकते हैं।
भाजपा ने आठ सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं, जबकि सपा ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। तीसरा उम्मीदवार नहीं आने की स्थिति में मुकाबले की जरूरत नहीं रह जाएगी और सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा पहुंच सकते हैं।
BJP के 8 उम्मीदवार कौन हैं?
भाजपा ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए जिन नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, उनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
इस सूची में संगठन से जुड़े नेताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई देती है। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा की सूची में तीन सामान्य वर्ग, तीन OBC और दो दलित उम्मीदवार शामिल हैं। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
धर्मपाल सिंह पर पार्टी का भरोसा
भाजपा की सूची में धर्मपाल सिंह का नाम प्रमुख है। वह उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं। उनके साथ ही पार्टी ने कई संगठनात्मक चेहरों को भी राज्यसभा के लिए मौका दिया है।
श्रुति गंगवार और प्रियंका सिंह रावत भी मैदान में
भाजपा की सूची में श्रुति गंगवार और प्रियंका सिंह रावत दो महिला चेहरे हैं। श्रुति गंगवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं, जबकि प्रियंका सिंह रावत पूर्व सांसद रह चुकी हैं। पार्टी की ओर से इस चयन को महिला प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन के लिहाज से भी देखा जा रहा है।
सपा के दो उम्मीदवार कौन हैं?
समाजवादी पार्टी पहले ही वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवारों ने लखनऊ में अपना नामांकन दाखिल किया है।
राम गोपाल यादव सपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं, जबकि धनराज नाथवानी को सपा की ओर से राज्यसभा के लिए अपेक्षाकृत नया चेहरा माना जा रहा है। नाथवानी उद्योग और खेल प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं।
तीसरे उम्मीदवार को लेकर क्यों था सस्पेंस?
दरअसल, सपा के पास राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कोशिश करने की गुंजाइश को लेकर पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी। कुछ सपा नेताओं की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर संकेत भी दिए गए थे। अगर सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती तो चुनाव दिलचस्प हो सकता था और विधायकों के वोट को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना बढ़ जाती।
लेकिन अब अखिलेश यादव के बयान के बाद सपा के इस विकल्प से पीछे हटने के संकेत मिल गए हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का मुकाबला लगभग समाप्त माना जा रहा है।

क्या 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना पक्का है?
राजनीतिक तौर पर तस्वीर काफी स्पष्ट है, लेकिन तकनीकी रूप से नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद ही निर्विरोध निर्वाचन की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी ही मैदान में हैं, इसलिए सभी 10 के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।
अखिलेश का फोकस अब 2027 विधानसभा चुनाव पर?
अखिलेश यादव की ‘403’ वाली पोस्ट का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही माना जा रहा है कि सपा अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को प्राथमिकता देना चाहती है। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव भाजपा और सपा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए संसाधन और राजनीतिक ऊर्जा लगाने के बजाय विधानसभा चुनाव की तैयारी पर फोकस करना सपा की बड़ी रणनीतिक पसंद के तौर पर देखा जा रहा है। यह फैसला विपक्षी गठबंधन और सपा की आगामी चुनावी रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
BJP के लिए भी बड़ा संदेश
सपा के तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने के बाद भाजपा की आठ सीटें लगभग सुनिश्चित होती दिख रही हैं। भाजपा के लिए यह सिर्फ राज्यसभा में संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का अवसर भी माना जा रहा है। उम्मीदवारों की सूची में अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व इसी दिशा में संकेत करता है।
ऐसे में उत्तर प्रदेश की राज्यसभा की 10 सीटों पर संभावित निर्विरोध निर्वाचन के बावजूद इसकी राजनीतिक अहमियत कम नहीं है। असली मुकाबला अब राज्यसभा की सीटों से ज्यादा 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के मैदान में देखने को मिलेगा।


