KAL Drone: भारत के पहले स्वदेशी लॉन्ग रेंज OWA ड्रोन KAL का पोखरण में सफल परीक्षण, 1000 किमी तक की रेंज का दावा
राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्वदेशी KAL लॉन्ग रेंज One-Way Attack ड्रोन का सफल फ्लाइट टेस्ट।


KAL Drone Test: भारत की स्वदेशी ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। नोएडा स्थित डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी IG Defence ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपने लॉन्ग रेंज One-Way Attack (OWA) ड्रोन ‘KAL’ का सफल फ्लाइट टेस्ट किया है। कंपनी के अनुसार KAL को 1,000 किलोमीटर तक की रेंज, 7-8 घंटे तक की उड़ान क्षमता और 50 किलोग्राम तक पेलोड के लिए डिजाइन किया गया है।
पोखरण में हुआ KAL ड्रोन का सफल परीक्षण
भारत के स्वदेशी लंबी दूरी के मानवरहित स्ट्राइक सिस्टम के विकास की दिशा में KAL ड्रोन का परीक्षण महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। IG Defence के अनुसार, यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। ड्रोन को एक वाहन पर लगाए गए लॉन्च प्लेटफॉर्म से उड़ाया गया। (business-standard.com)
परीक्षण के दौरान ड्रोन के एयरफ्रेम, प्रोपल्शन, एवियोनिक्स, नेविगेशन और मिशन सिस्टम के एकीकरण को जांचा गया। हालांकि, कंपनी ने यह सार्वजनिक नहीं किया कि परीक्षण के दौरान KAL ने कितनी दूरी तय की या कितनी देर तक उड़ान भरी। (moneycontrol.com)
क्या है KAL ड्रोन?
KAL एक One-Way Attack Drone है। इसका मतलब है कि इसे मिशन पूरा करने के बाद वापस लौटने वाले सामान्य निगरानी ड्रोन की तरह डिजाइन नहीं किया गया है। यह एकतरफा मिशन के लिए विकसित किया गया सिस्टम है।
IG Defence के अनुसार, KAL को लंबी दूरी की उड़ान, स्वायत्त संचालन और पेलोड क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। कंपनी ने इसे भारत में डिजाइन और विकसित किया है। (moneycontrol.com)
1000 किलोमीटर तक की रेंज का दावा
KAL की सबसे प्रमुख विशेषताओं में इसकी बताई गई लंबी दूरी की क्षमता है। कंपनी के अनुसार, यह ड्रोन 1,000 किलोमीटर तक की रेंज के लिए डिजाइन किया गया है।
इसके अलावा कंपनी के अनुसार इसकी उड़ान अवधि 7 से 8 घंटे तक, पेलोड क्षमता 50 किलोग्राम तक और अधिकतम ऑपरेटिंग ऊंचाई 5,000 मीटर तक हो सकती है। ये आंकड़े कंपनी द्वारा बताए गए डिजाइन स्पेसिफिकेशन हैं; पोखरण परीक्षण में इन सभी क्षमताओं का स्वतंत्र रूप से प्रदर्शन सार्वजनिक नहीं किया गया है। (moneycontrol.com)
ऑटोनॉमस नेविगेशन सिस्टम से लैस
KAL में Multi-Band GNSS और Inertial Navigation System (INS) को एकीकृत किया गया है। इन प्रणालियों का इस्तेमाल ड्रोन की नेविगेशन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है।
कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम स्वायत्त उड़ान और मिशन संचालन के लिए तैयार किया गया है। इससे ड्रोन को पूर्व-निर्धारित मिशन प्रोफाइल के अनुसार उड़ान भरने में मदद मिल सकती है। (moneycontrol.com)
वाहन से लॉन्च किया गया KAL
परीक्षण के दौरान KAL को वाहन-mounted launch platform से लॉन्च किया गया। इस तरह का प्लेटफॉर्म ड्रोन को मोबाइल लॉन्च क्षमता प्रदान करता है और अलग-अलग स्थानों से इसके संचालन की संभावना को बढ़ाता है।
हालांकि, परीक्षण के दौरान वास्तविक मिशन दूरी, उड़ान अवधि और किसी लाइव पेलोड के इस्तेमाल की जानकारी कंपनी ने सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए इन पहलुओं को लेकर उपलब्ध जानकारी को कंपनी के दावों और घोषित डिजाइन क्षमताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए। (moneycontrol.com)
Dronathon 2026 के बाद पोखरण में फिर ड्रोन गतिविधियां
KAL का परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2026 में पोखरण में अपना पहला Dronathon-2026 आयोजित किया था। 14 से 16 सितंबर तक चले इस कार्यक्रम में 20 से ज्यादा रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप, MSME और इनोवेटर्स ने मानवरहित प्रणालियों और काउंटर-ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन किया था। (pib.gov.in)
Dronathon का उद्देश्य वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में भारतीय मानवरहित प्रणालियों की तकनीकी क्षमताओं का आकलन करना और उद्योग को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ना था। भारतीय वायुसेना ने इसी दौरान IAF UAS Roadmap भी जारी किया था। (pib.gov.in)
भारत में बढ़ रहा है स्वदेशी ड्रोन विकास
KAL का परीक्षण ऐसे दौर में हुआ है जब भारत में सैन्य और सुरक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी मानवरहित प्रणालियों के विकास पर जोर बढ़ रहा है। निगरानी, टोही, स्वायत्त संचालन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काउंटर-ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में देश की कंपनियां और शोध संस्थान नए सिस्टम विकसित कर रहे हैं।
भारतीय वायुसेना का Dronathon-2026 भी इसी व्यापक स्वदेशीकरण प्रयास का हिस्सा था, जिसमें एयरफ्रेम के साथ-साथ प्रोपल्शन, सेंसर, संचार, ऑटोनॉमी और काउंटरमेजर्स जैसे पूरे UAS इकोसिस्टम पर ध्यान दिया गया। (pib.gov.in)
KAL की प्रमुख विशेषताएं
| विशेषता | उपलब्ध जानकारी |
|---|---|
| ड्रोन का नाम | KAL |
| प्रकार | One-Way Attack Drone |
| निर्माता | IG Defence |
| परीक्षण स्थल | पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज, राजस्थान |
| अधिकतम बताई गई रेंज | 1,000 किमी तक |
| बताई गई उड़ान अवधि | 7-8 घंटे |
| बताई गई पेलोड क्षमता | 50 किलोग्राम तक |
| ऑपरेटिंग ऊंचाई | 5,000 मीटर तक |
| लॉन्च सिस्टम | वाहन-माउंटेड लॉन्च प्लेटफॉर्म |
| नेविगेशन | Multi-Band GNSS + INS |
उपरोक्त रेंज, एंड्योरेंस, पेलोड और ऊंचाई के आंकड़े निर्माता द्वारा बताए गए डिजाइन स्पेसिफिकेशन हैं; पोखरण परीक्षण में इन सभी आंकड़ों को हासिल किए जाने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। (moneycontrol.com)
निष्कर्ष
राजस्थान के पोखरण में KAL लॉन्ग रेंज One-Way Attack ड्रोन का सफल फ्लाइट टेस्ट भारत के स्वदेशी मानवरहित सिस्टम विकास में एक नई उपलब्धि है। IG Defence के अनुसार KAL को 1,000 किलोमीटर तक की रेंज, 7-8 घंटे की उड़ान अवधि और 50 किलोग्राम तक पेलोड के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि, कंपनी ने पोखरण परीक्षण के दौरान हासिल की गई वास्तविक दूरी और उड़ान अवधि सार्वजनिक नहीं की है। यह परीक्षण भारत में विकसित लंबी दूरी के स्वदेशी ड्रोन सिस्टम की तकनीकी क्षमता के परीक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




