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US Iran Tension: अमेरिका ने पेजेश्कियान-अराघची को दिया वीजा, सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ी चिंता

पेजेश्कियान-अराघची को अमेरिका ने दिया वीजा, सऊदी में हूती हमलों से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सदस्यों को अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई-लेवल बैठक में शामिल होने के लिए वीजा मंजूर कर दिया है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती समूह के हमलों के कारण सऊदी अरब और लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।

पेजेश्कियान और अराघची को मिला अमेरिका का वीजा

अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि ईरान के ‘कोर डेलिगेशन’ को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने की अनुमति दी गई है। इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष के बीच यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद ईरानी शीर्ष अधिकारी अमेरिकी धरती पर UNGA में हिस्सा ले सकेंगे।

वीजा मिला, लेकिन कई पाबंदियां भी रहेंगी

अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा तो मंजूर किया है, लेकिन इसके साथ यात्रा और खरीदारी से जुड़ी पाबंदियां भी लागू रहेंगी। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की आवाजाही सीमित होगी और उन्हें कुछ लग्जरी तथा अन्य सामान खरीदने की अनुमति नहीं होगी।

अमेरिका ने यह भी कहा है कि इस साल ईरान का प्रतिनिधिमंडल पिछले साल की तुलना में छोटा होगा। वॉशिंगटन ने इस फैसले को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की मेजबानी करने वाले देश के रूप में अपनी जिम्मेदारियों से जोड़ा है।

UNGA में पेजेश्कियान के भाषण पर नजर

पेजेश्कियान के अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने की उम्मीद है। ऐसे समय में उनका न्यूयॉर्क पहुंचना अहम माना जा रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मुद्दे भी तनाव के केंद्र में हैं।

हालांकि, वीजा दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई नया समझौता हो गया है। दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद और सैन्य तनाव अभी भी जारी हैं।

सऊदी अरब में हूती हमलों से सुरक्षा चिंता

इसी बीच यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच तनाव भी बढ़ा है। हाल के दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी क्षेत्र और लाल सागर में बुनियादी ढांचे तथा समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाने की घोषणाएं सामने आई हैं।

15 सितंबर को सऊदी अरब ने मक्का और जेद्दा समेत कई इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए थे। रिपोर्ट के अनुसार ये अलर्ट कुछ समय बाद हटा लिए गए और उस समय सऊदी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि कोई प्रोजेक्टाइल वहां गिरा या नहीं।

लाल सागर और बाब-अल-मंदेब पर भी नजर

हूती गतिविधियों का असर केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बनी रहती है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया हूती बढ़त ने बाब-अल-मंदेब के आसपास रणनीतिक स्थिति को बदल दिया है और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ी है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कूटनीति की गुंजाइश?

एक तरफ अमेरिका ने ईरानी शीर्ष अधिकारियों को UNGA में आने की अनुमति दी है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में सैन्य तनाव जारी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका, ईरान और दूसरे देशों के नेताओं के बीच संभावित राजनयिक संपर्क पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

फिलहाल वीजा फैसले को संवाद का अवसर माना जा सकता है, लेकिन इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने या किसी समझौते की पुष्टि नहीं होती। क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम, तेल आपूर्ति और समुद्री मार्ग आने वाले दिनों में प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।

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