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Trump Tariffs: अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक तनाव से बढ़ी हलचल, सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ रिश्तों पर भी नजर

Trump Tariffs: अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक तनाव से बढ़ी हलचल, सऊदी अरब पर भी नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ और व्यापार नीति को लेकर वैश्विक बाजारों में एक बार फिर चर्चा तेज है। अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावनाओं और नए व्यापारिक कदमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसी बीच मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण अमेरिका-सऊदी अरब संबंध और तेल बाजार भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

रूस से तेल खरीदने वालों पर नए टैरिफ की चर्चा

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को मंजूरी दी है। इस कानून में रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर राष्ट्रपति को अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देने का प्रावधान शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह कदम भारत और चीन जैसे रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत ने अमेरिका के इस संभावित कदम को लेकर कहा है कि रूस से तेल खरीद पर नए शुल्क द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को प्रभावित कर सकते हैं। नई दिल्ली का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदना जारी रखेगा।

टैरिफ की अनिश्चितता से बाजारों पर असर

अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव का असर केवल अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों तक सीमित नहीं रहता। टैरिफ बढ़ने से आयात लागत, कंपनियों की सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक अमेरिका की ओर से आने वाले हर नए शुल्क संबंधी फैसले पर नजर रखते हैं।

J.P. Morgan Global Research के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ घोषणाओं ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बाजार की अस्थिरता को बढ़ाया है तथा वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए दबाव पैदा किया है।

सऊदी अरब के साथ अमेरिका के रिश्ते क्यों अहम?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं। हाल ही में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से जेद्दा में मुलाकात की थी। बातचीत में क्षेत्रीय घटनाक्रम और यमन के हूती विद्रोहियों से बढ़े खतरे पर चर्चा हुई।

रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ने हूती गतिविधियों के खिलाफ अमेरिकी मदद की मांग की थी। अमेरिका ने सीधे सैन्य हमले की मंजूरी देने के बजाय खुफिया जानकारी साझा करने और टारगेटिंग सहायता देने की बात कही।

ओवल ऑफिस की मुलाकात को लेकर क्या है तथ्य?

ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस की जिस ओवल ऑफिस बैठक की तस्वीरें और खबरें सामने आती हैं, वह 18 नवंबर 2025 की आधिकारिक बैठक है। व्हाइट हाउस के रिकॉर्ड में इसे ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान के बीच द्विपक्षीय बैठक बताया गया है।

सितंबर 2026 के मौजूदा घटनाक्रम में दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय मुद्दों पर संपर्क की खबरें हैं, लेकिन नई ओवल ऑफिस बैठक को लेकर उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में अलग से ऐसी पुष्टि नहीं मिली है। इसके बजाय ट्रंप के अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत करने की संभावना की रिपोर्ट है।

तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर

अमेरिका-सऊदी संबंध और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार के लिए भी अहम है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है और क्षेत्र में किसी बड़े व्यवधान की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ सकता है। इससे आयात बिल, रुपये की चाल और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर बाजार की नजर रहती है।

आगे क्या देखेंगे निवेशक?

आने वाले दिनों में बाजार की नजर मुख्य रूप से अमेरिकी टैरिफ से जुड़े नए फैसलों, रूस के तेल पर संभावित प्रतिबंधों, अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता और मध्य पूर्व की स्थिति पर रहेगी। अगले सप्ताह ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक भी व्यापार और टैरिफ के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, टैरिफ नीति, कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक तनाव ऐसे प्रमुख कारक हैं जो आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

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