Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर निर्माण में मजदूरों की कमी से काम हुआ था धीमा, अब तेजी से पूरा हो रहा निर्माण
मजदूरों की कमी से धीमा पड़ा था राम मंदिर निर्माण, अब अंतिम चरण में काम

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कुछ समय पहले मजदूरों की कमी की खबर सामने आई थी। जुलाई 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण स्थल पर काम कर रहे करीब 8 से 9 हजार मजदूरों में से लगभग आधे मजदूर काम छोड़कर चले गए थे, जिसके चलते निर्माण की रफ्तार प्रभावित हुई थी। उस समय राम मंदिर निर्माण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने काम की गति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त श्रमिकों को जोड़ने के निर्देश दिए थे।

मजदूरों की कमी बनी थी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम की स्थिति और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में श्रमिक निर्माण स्थल से चले गए थे। निर्माण समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर के शिखर और ऊपरी हिस्सों के निर्माण को समय पर पूरा करना था।
नृपेंद्र मिश्रा ने निर्माण एजेंसी L&T को अतिरिक्त मजदूरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे। उस समय उन्होंने कहा था कि अगर करीब 200 से 250 अतिरिक्त श्रमिक नहीं जोड़े गए तो तय समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
निर्माण कार्य की समयसीमा पर पड़ा था असर
मजदूरों की कमी के कारण निर्माण कार्य निर्धारित गति से पीछे चल रहा था। उस समय निर्माण समिति ने अनुमान लगाया था कि काम की रफ्तार नहीं बढ़ी तो निर्धारित समय से करीब दो महीने की देरी हो सकती है।
हालांकि, यह स्थिति अब पुरानी है। 2026 की रिपोर्टों के अनुसार मंदिर परिसर का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने की दिशा में है और 30 सितंबर 2026 तक अधिकांश कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने की योजना बताई गई है।
अब निर्माण अंतिम चरण में
राम मंदिर का मुख्य ढांचा पूरा होने के बाद अब परिसर से जुड़े कई अन्य कार्यों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर के करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य को ट्रस्ट को हस्तांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
यानी मजदूरों की कमी से निर्माण धीमा पड़ने वाली खबर को वर्तमान स्थिति से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। 2024 में श्रमिकों की कमी से काम प्रभावित हुआ था, लेकिन 2026 में परियोजना अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।



