Kajari Teej 2026 Date: कजरी तीज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के खास नियम
कजरी तीज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत नियम

हिंदू धर्म में तीज के व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इन्हीं में से एक है कजरी तीज, जिसे सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से रखती हैं। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा करने की परंपरा है। आइए जानते हैं 2026 में कजरी तीज कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ समय, पूजा विधि और व्रत के जरूरी नियम।

कजरी तीज 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में कजरी तीज 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।
इस दिन महिलाएं सुबह स्नान और पूजा के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं। कई स्थानों पर कजरी तीज के अवसर पर झूले डालने, लोकगीत गाने और पारंपरिक तरीके से उत्सव मनाने की भी परंपरा है।
नोट: पूजा का सटीक मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है। पूजा करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता दें।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व
कजरी तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति समर्पण का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के माध्यम से महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।
कुंवारी लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। हालांकि व्रत रखने की परंपरा और नियम अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं।
कजरी तीज पर किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
कजरी तीज के दिन मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में नीमड़ी माता की पूजा का भी विशेष महत्व है।
पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसमें सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, वस्त्र और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल की जा सकती है।

कजरी तीज की पूजा विधि
कजरी तीज के दिन पूजा के लिए महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और साफ कपड़े पहनती हैं।
पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:
- पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाएं।
- भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
- माता पार्वती को सिंदूर और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- नीमड़ी माता की पूजा करें, जहां यह परंपरा प्रचलित हो।
- शिव-पार्वती की कथा सुनें या पढ़ें।
- कजरी तीज की व्रत कथा का पाठ करें।
- आरती के बाद परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?
कजरी तीज के व्रत में महिलाएं अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रख सकती हैं। निर्जला व्रत सभी के लिए जरूरी नहीं है।
व्रत रखने वालों को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या डॉक्टर ने लंबे समय तक भूखे रहने से मना किया है, तो व्रत की कठोरता कम रखना बेहतर है।
पूरे दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करने तथा सात्विक आचरण रखने की परंपरा है।
कजरी तीज पर क्या करें?
कजरी तीज के दिन पूजा-पाठ के अलावा जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग सामग्री देकर पर्व की शुभकामनाएं भी देती हैं।
निष्कर्ष
कजरी तीज 2026 का पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना तथा वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। इस दिन व्रत, शिव-पार्वती पूजा, व्रत कथा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा का समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार जरूर जांच लें।




