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Crude Oil Alert: $120 तक पहुंच सकता है कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल पर बढ़ा दबाव

महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? Goldman Sachs ने दी $120 Crude की चेतावनी

पेट्रोल-डीजल इस्तेमाल करने वालों के लिए आने वाले दिनों में चिंता बढ़ सकती है। Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz में तेल की सप्लाई बाधित रहती है, तो Brent crude oil की कीमत चौथी तिमाही में $120 प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है। हालांकि, यह Goldman Sachs का बेस केस नहीं है। बैंक का मौजूदा बेस केस तनाव कम होने पर चौथी तिमाही में Brent करीब $80 प्रति बैरल रहने का है।

$120 तक क्यों पहुंच सकता है कच्चा तेल?

Goldman Sachs के मुताबिक मिडिल ईस्ट में तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों पर तेज दबाव आ सकता है। बैंक ने अपने 20 जुलाई के नोट में कहा था कि Persian Gulf से तेल का प्रवाह युद्ध से पहले के स्तर के 45% से नीचे आ गया है।

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित होने पर वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी का डर बढ़ जाता है।

क्या भारत में तुरंत महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

यहां एक बात समझना जरूरी है कि क्रूड ऑयल के $120 तक पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल-डीजल उसी समय महंगा हो जाएगा। घरेलू ईंधन कीमतों पर कच्चे तेल के अलावा रुपये की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति जैसे कई कारकों का असर होता है।

लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत के लिए दबाव जरूर बढ़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा क्रूड देश के इंपोर्ट बिल, रुपये और महंगाई पर असर डाल सकता है।

महंगे तेल का आम आदमी पर क्या असर?

अगर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो इसका असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। पेट्रोल और डीजल महंगा होने पर ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ सकती है। इससे माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और कई वस्तुओं की कीमतों पर अप्रत्यक्ष दबाव आ सकता है।

डीजल की कीमतों का असर खेती और परिवहन क्षेत्र पर भी पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा क्रूड महंगाई के मोर्चे पर सरकार और RBI के लिए भी चुनौती बन सकता है।

अभी क्या है क्रूड का हाल?

हालिया कारोबार में भी तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 14 अगस्त को Brent crude करीब $87 प्रति बैरल के आसपास था। हालांकि, मध्य-पूर्व तनाव और हॉर्मुज से जुड़ी सप्लाई चिंताओं के कारण कीमतों में तेजी का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

यानी फिलहाल $120 कोई तय कीमत नहीं बल्कि एक जोखिम वाला परिदृश्य है। Goldman Sachs का बेस अनुमान इससे काफी नीचे है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चेतावनी?

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमत में तेज उछाल बेहद महत्वपूर्ण है। अगर क्रूड लंबे समय तक महंगा रहता है तो इससे देश का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

हालांकि, अगर मिडिल ईस्ट तनाव कम होता है और हॉर्मुज से तेल की आवाजाही सामान्य होती है, तो Goldman Sachs के बेस केस के मुताबिक कीमतें काफी नीचे रह सकती हैं। इसलिए फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को निश्चित मानना सही नहीं होगा।

निष्कर्ष

Goldman Sachs की $120 क्रूड ऑयल चेतावनी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन यह बैंक का बेस केस नहीं है। असली स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि हॉर्मुज संकट और मिडिल ईस्ट तनाव कितने समय तक जारी रहते हैं। अगर सप्लाई बाधित रही और क्रूड $120 के पार गया, तो भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

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