Crude Oil Price Today: कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
कच्चा तेल 107 डॉलर के करीब, भारत पर क्या होगा असर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। 29 सितंबर 2026 को Brent crude करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

107 डॉलर के करीब पहुंचा Brent Crude
रिपोर्टों के मुताबिक मंगलवार को Brent crude futures करीब 1.5% बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI crude करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। इससे पहले सोमवार को भी Brent में करीब 3% की तेजी दर्ज की गई थी।
तेल बाजार में तेजी लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में देखने को मिली है। बाजार की नजर पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान बातचीत की दिशा पर बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान तनाव क्यों बढ़ा रहा है तेल की कीमत?
तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह मध्य पूर्व से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में स्पष्ट प्रगति नहीं होने से निवेशकों में चिंता बनी हुई है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल प्रवाह में आंशिक सुधार की खबरें भी सामने आई हैं। इसके बावजूद बाजार में तत्काल उपलब्ध सप्लाई को लेकर जोखिम बना हुआ है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से देश के इंपोर्ट बिल और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। Reuters ने भी तेल की तेजी को भारत जैसी बड़ी क्रूड-आयातक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बताया है।
क्रूड में तेजी का असर रुपये पर भी पड़ सकता है, क्योंकि महंगे तेल के लिए अधिक डॉलर की जरूरत होती है। 29 सितंबर को भारतीय रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के पार चला गया, जिससे बाजार में चिंता और बढ़ी।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन इसका असर तुरंत और सीधे तौर पर घरेलू पंप कीमतों में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। घरेलू ईंधन कीमतों पर क्रूड के अलावा रुपये की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति जैसे कई कारक असर डालते हैं।
शेयर बाजार पर भी बढ़ा दबाव
महंगे क्रूड और कमजोर रुपये का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। 29 सितंबर को शुरुआती कारोबार में भारतीय बाजार छह महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। Reuters के मुताबिक Nifty 50 करीब 0.77% और Sensex करीब 0.82% नीचे कारोबार कर रहे थे।
आने वाले दिनों में तेल की कीमतों के साथ अमेरिका-ईरान तनाव, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति और वैश्विक सप्लाई पर बाजार की नजर बनी रहेगी।




