UP Bihar Flood 2026: गंगा का जलस्तर बढ़ने से यूपी-बिहार में बाढ़ का खतरा, कई इलाकों में बढ़ी चिंता
गंगा का जलस्तर बढ़ा, यूपी-बिहार में बाढ़ का खतरा

लखनऊ/पटना: उत्तर प्रदेश और बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में हुई भारी बारिश और अलग-अलग बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। बिहार के भागलपुर और आसपास के इलाकों में नदी के जलस्तर को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है, जबकि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद क्षेत्र में भी रामगंगा और गंगा के जलस्तर को लेकर प्रशासन निगरानी कर रहा है।

बिहार में गंगा के जलस्तर पर नजर
बिहार के भागलपुर, सुल्तानगंज और कहलगांव जैसे गंगा किनारे के क्षेत्रों में नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को लेकर प्रशासन सतर्क है। इससे पहले सितंबर में कहलगांव और भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने की जानकारी भी सामने आई थी, लेकिन नदी की स्थिति लगातार बदलती रही है।
वहीं, नेपाल और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हुई बारिश के बाद बिहार की कई नदियों में पानी बढ़ने की स्थिति सामने आई थी। गंडक नदी के बढ़े डिस्चार्ज के कारण बिहार के कई जिलों के साथ उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों को भी अलर्ट पर रखा गया था।
मुरादाबाद में रामगंगा ने बढ़ाई चिंता
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी रामगंगा नदी का जलस्तर पहले खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है। सितंबर की शुरुआत में नदी का जलस्तर 190 मीटर के पार दर्ज किया गया था, जबकि खतरे का निशान 190.60 मीटर बताया गया था। नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई थी।
मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में गंगा-रामगंगा के जलस्तर के साथ बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी पर भी नजर रखी जा रही है। अमरोहा के खादर क्षेत्र में बढ़े जलस्तर के कारण खेतों में पानी पहुंचने और फसलों को नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं।
अभी बारिश का नहीं है नया IMD हाई अलर्ट
मौसम की बात करें तो 29 सितंबर को जारी IMD के सब-डिविजनल अपडेट में 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई विशेष मौसम चेतावनी नहीं थी। बिहार के लिए भी इसी अवधि में कोई विशेष चेतावनी दर्ज नहीं की गई। इसका मतलब यह है कि फिलहाल नदी का बढ़ा जलस्तर और बाढ़ का स्थानीय जोखिम अलग विषय है, इसे नए IMD हाई अलर्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रशासन की नदियों और तटबंधों पर नजर
नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी चिंता का कारण बन सकती है। प्रशासन की ओर से तटबंधों, निचले इलाकों और संपर्क मार्गों की निगरानी की जा रही है। पिछले दिनों मुरादाबाद क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नावों और राहत-बचाव संसाधनों को भी तैयार रखा गया था।
ऐसे में गंगा और रामगंगा के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को नदी के जलस्तर, बैराज से पानी छोड़े जाने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर नजर रखने की जरूरत है। स्थिति बारिश और नदी के जलप्रवाह के अनुसार तेजी से बदल सकती है।




