Hormuz Crisis: तनाव बढ़ा तो 80% जहाजों ने बदला रास्ता, ओमान रूट बना नया विकल्प
तनाव बढ़ा तो 80% जहाजों ने बदला रास्ता, ओमान रूट बना नया विकल्प

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर साफ दिखाई दे रहा है। शिपिंग ट्रैकिंग फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में 80% से अधिक जहाजों ने होर्मुज के पारंपरिक मार्ग के बजाय ओमान की ओर से गुजरने वाले वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

क्यों बदला जहाजों ने रास्ता?
होर्मुज क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच नियंत्रण को लेकर लगातार अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य उसके नियंत्रण में है, जबकि अमेरिका भी वहां अपनी सैन्य मौजूदगी और समुद्री गतिविधियों को लेकर अलग रुख रखता है। इस अनिश्चितता ने जहाज कंपनियों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ा दिया है।
ऐसे माहौल में कई शिपिंग कंपनियां जोखिम कम करने के लिए ओमान की ओर से गुजरने वाले वैकल्पिक समुद्री मार्ग को प्राथमिकता दे रही हैं। इसका मकसद विवादित या अधिक जोखिम वाले हिस्से से बचते हुए जहाजों की आवाजाही जारी रखना है।
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है। इसके जरिए दुनिया के बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और LNG की आवाजाही होती है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संस्था UNCTAD के अनुसार, यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है।
यही कारण है कि यहां लंबे समय तक तनाव रहने से सिर्फ ईरान या खाड़ी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि एशिया, यूरोप और दुनिया के ऊर्जा बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों पर भी असर
होर्मुज में जहाजों की आवाजाही कम होने और वैकल्पिक मार्ग अपनाए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। 19 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 0.5% बढ़कर $91.44 प्रति बैरल पहुंच गया था, जबकि WTI भी बढ़ा। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि अगर समुद्री आपूर्ति पर दबाव लंबे समय तक जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
भारत समेत एशियाई देशों पर नजर
होर्मुज से गुजरने वाला तेल और गैस दुनिया के कई देशों के लिए अहम है। ऐसे में जहाजों के रास्ते बदलने से शिपिंग समय, बीमा लागत और परिवहन खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर ऊर्जा और दूसरी आयातित वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए भी होर्मुज क्षेत्र में स्थिरता महत्वपूर्ण है।
अभी क्या स्थिति है?
रॉयटर्स के मुताबिक 19 अगस्त तक होर्मुज से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या हाल के औसत से काफी नीचे रही। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी और ईरानी दावों के बीच समुद्री कारोबार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया है। 80% से अधिक जहाजों का ओमान रूट की ओर जाना इस बात का संकेत है कि कंपनियां सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर समुद्री व्यापार के साथ-साथ तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
