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संसद का मानसून सत्र आज खत्म, आखिरी दिन भी हंगामे के आसार; सरकार-विपक्ष में टकराव जारी

आज खत्म हुआ मानसून सत्र, हंगामे के बीच सरकार-विपक्ष आमने-सामने

संसद का मानसून सत्र आज, 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो रहा है। सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा और राज्यसभा में भारी हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच कार्यवाही आगे बढ़ी। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

आखिरी दिन भी जारी रहा सियासी घमासान

मानसून सत्र के अंतिम दिन संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विपक्षी सांसदों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग और विरोध के बीच कार्यवाही प्रभावित हुई। इससे पहले पूरे सत्र में भी लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, सत्र के दौरान छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई, NEET से जुड़े मुद्दे, राम मंदिर चंदा विवाद और FCRA संशोधन बिल जैसे विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

अमित शाह के जवाब को लेकर भी हुआ विवाद

छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह के सदन में जवाब की मांग करता रहा। सरकार की ओर से चर्चा के जरिए मुद्दे पर जवाब देने की पेशकश की गई थी, लेकिन इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। इस गतिरोध का असर सदन की कार्यवाही पर भी पड़ा।

विपक्ष का कहना था कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए, जबकि सरकार चर्चा के माध्यम से सभी सवालों का जवाब देने के पक्ष में रही।

FCRA बिल समेत कई मुद्दे रहे चर्चा में

मानसून सत्र के दौरान Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) संशोधन बिल भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रहा। विपक्षी दलों के बीच भी इस बिल को लेकर एक जैसी राय नहीं रही। कांग्रेस ने बिल को वापस लेने की मांग की, जबकि कुछ विपक्षी दलों ने इसे संसदीय समिति या JPC के पास भेजने की मांग उठाई।

इसके अलावा ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स समेत कई विधेयकों पर भी सदन में चर्चा और हंगामा देखने को मिला।

हंगामे के बीच कितनी हुई संसद की कार्यवाही?

इस बार का मानसून सत्र लगातार व्यवधानों के कारण संसद की उत्पादकता को लेकर भी सवालों में रहा। रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा की उत्पादकता करीब 19% और राज्यसभा की करीब 39% रही। इसके बावजूद सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही।

रिपोर्टों के अनुसार सत्र में 12 विधेयक पेश किए गए और 11 विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए। यानी हंगामे के बावजूद विधायी कामकाज पूरी तरह ठप नहीं रहा।

वंदे मातरम के साथ हुआ सत्र का समापन

सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ का विशेष आयोजन भी हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद रहे। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

निष्कर्ष

संसद का मानसून सत्र 2026 राजनीतिक हंगामे और विधायी कामकाज, दोनों के लिए चर्चा में रहा। आखिरी दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहा। अब सत्र समाप्त होने के बाद विपक्ष जहां सरकार को कम उत्पादकता और मुद्दों पर चर्चा न होने के लिए घेर सकता है, वहीं सरकार पारित विधेयकों और अपने विधायी कामकाज को उपलब्धि के तौर पर पेश करेगी।

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