ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, नए हमले हुए तो Gulf States भी बनेंगे निशाना
ईरान की अमेरिका को चेतावनी, नए हमले हुए तो Gulf States पर होगी जवाबी कार्रवाई

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ नए अमेरिकी हमले किए गए तो वह जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ा सकता है और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों व बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस चेतावनी के बाद Gulf States की सुरक्षा और Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ईरान ने क्यों दी ऐसी चेतावनी?
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने Gulf States को संदेश दिया है कि अगर अमेरिका उसके क्षेत्र पर दोबारा हमला करता है, तो जवाबी कार्रवाई केवल अमेरिकी ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकती। ईरान ने क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे को संभावित निशाने के तौर पर चेतावनी दी है।
इस चेतावनी का उद्देश्य खाड़ी देशों पर दबाव बनाना भी माना जा रहा है, ताकि वे अमेरिका से ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई नहीं करने और बातचीत की राह अपनाने की अपील करें। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय नेताओं तक यह संदेश पहुंचाया है।
Gulf States के सामने बढ़ी चुनौती
ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष का सीधा असर सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई और ओमान जैसे देशों पर पड़ सकता है। इन देशों में महत्वपूर्ण तेल, गैस, बिजली और बंदरगाह से जुड़े बुनियादी ढांचे मौजूद हैं।
खाड़ी देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में वे खुद भी संघर्ष की चपेट में आ सकते हैं।
Strait of Hormuz पर भी नजर
इस पूरे तनाव में Strait of Hormuz बेहद महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर डाल सकती है।
इससे पहले भी अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान ईरान की ओर से Hormuz को लेकर कड़े बयान और कार्रवाई सामने आ चुकी है। जुलाई में ईरान और अमेरिका के बीच हमलों के दौरान खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर आए थे।
तेल की कीमतों और बाजार पर भी असर संभव
अगर तनाव और बढ़ता है और खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों या समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ता है, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेज उछाल से एशिया और यूरोप समेत कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी लंबे समय तक Hormuz क्षेत्र में अस्थिरता चिंता का विषय हो सकती है।
Gulf देशों की कोशिश क्या है?
खाड़ी देशों की कोशिश फिलहाल तनाव को और बढ़ने से रोकने की है। क्षेत्रीय सरकारें अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर देती रही हैं, क्योंकि किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा और समुद्री परिवहन भी प्रभावित हो सकता है।
निष्कर्ष
ईरान की नई चेतावनी ने अमेरिका-ईरान तनाव को एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर बना दिया है। अगर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव दोबारा बढ़ता है, तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित रहने के बजाय Gulf States, ऊर्जा बाजार और Strait of Hormuz तक पहुंच सकता है। फिलहाल क्षेत्रीय देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संघर्ष को और फैलने से रोकना है।



