देश-विदेश

विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने की मुहिम की समीक्षा आज

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ मिलकर विदेशी मुद्रा जमा अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगी।

आरबीआइ ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआइ) और ओवरसीज सिटिजंस आफ इंडिया (ओसीआइ) से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए नए विदेशी मुद्रा जमा पर ब्याज दर की सीमा को 30 सितंबर तक हटा लिया है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब विदेशी मुद्रा जमा का प्रवाह काफी कम हो गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशी मुद्रा जमा 7.1 अरब डालर से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 94.6 करोड़ डालर रह गया।

कम हो जाती है बैंकों की लागत

नई व्यवस्था के तहत, आरबीआइ बैंकों को तीन से पांच की परिपक्वता वाले विदेशी मुद्रा जमा के लिए रियायती विदेश मुद्रा स्वैप सुविधा दे रहा है। इससे विदेशी मुद्रा जोखिम को हेज करने में बैंकों की लागत काफी कम हो जाती है।

इसके अलावा, आरबीआइ ने पीएसयू को 30 सितंबर, 2026 तक ईसीबी जुटाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा का भी एलान किया है। सरकारी कंपनियां खासकर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) आमतौर पर ईसीबी के जरिये सालाना लगभग 10-12 अरब डालर जुटाती हैं।

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