ट्रंप के फैसले पड़े भारी, इसलिए बड़े खर्चे करने से डर रहे अमेरिकी

अमेरिका से कमजोर खुदरा बिक्री आंकड़ों और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया है। निवेशकों को अब बिना ब्याज वाले एसेट्स अधिक आकर्षक लग रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बॉन्ड यील्ड में कमी कीमती धातुओं के लिए सहायक माहौल बनाती है, जिससे आर्थिक सुस्ती या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद में इनकी खरीदारी बढ़ती है। बाजार अब फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें घटाने का दबाव महसूस कर रहा है।
अमेरिका से आए कमजोर रिटेल सेल्स आंकड़ों के बाद गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेज उछाल (Gold Silver Price Hike) देखने को मिला है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड एक महीने के निचले स्तर के करीब फिसल गई, जिससे सोना-चांदी जैसे बिना ब्याज देने वाले एसेट्स निवेशकों (Gold Silver Investment) को ज्यादा आकर्षक लगने लगे।
वैश्विक बाजार में कितना बढ़ा सोना-चांदी?
स्पॉट गोल्ड करीब 1.04% बढ़कर 5,083 डॉलर प्रति औंस (gold price today) के पार चला गया। सिल्वर ने और मजबूत प्रदर्शन किया। स्पॉट सिल्वर करीब 4.67% उछला और कीमत 3.75 डॉलर बढ़कर 84 डॉलर प्रति औंस (silver price today) के पार चली गई।
तेजी पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
विश्लेषकों का कहना है कि बॉन्ड यील्ड में गिरावट गोल्ड-सिल्वर के लिए सपोर्टिव माहौल बनाती है। कम यील्ड का मतलब है कि सुरक्षित लेकिन बिना रिटर्न वाले एसेट्स को रखने की ‘ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट’ घट जाती है। यही वजह है कि आर्थिक सुस्ती या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के समय कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ती है।
दिसंबर में क्यों थमी अमेरिकी रिटेल सेल्स ग्रोथ?
ताजा आंकड़ों में दिखा कि दिसंबर में अमेरिकी रिटेल सेल्स ग्रोथ लगभग थम गई। लोगों ने गाड़ियों और बड़े खर्चों पर हाथ खींच लिया, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। बाजार अब मान रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि फेड के कुछ अधिकारी फिलहाल दरों में जल्दबाजी में बदलाव के पक्ष में नहीं दिख रहे, लेकिन निवेशकों की नजर आने वाले अहम डेटा पर टिकी है। आज जारी होने वाला नॉन-फार्म पेरोल्स (नौकरी) डेटा और शुक्रवार को आने वाला महंगाई आंकड़ा आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
कम ब्याज दरों का माहौल आम तौर पर गोल्ड-सिल्वर के लिए फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में अनिश्चित वैश्विक माहौल में निवेशक फिर से कीमती धातुओं को सुरक्षित ठिकाने के रूप में देख रहे हैं।




