Energy Policy : बाइडेन के बनाए कानून पर ट्रंप का नया रुख क्या संकेत देता?
रूसी तेल पर बैन लगाने वाले कानून पर ट्रंप ने उठाए सवाल, बोले- इसकी करूंगा समीक्षा, फैसले पर टिकी दुनिया की नजरें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर रूस से जुड़े तेल आयात के मुद्दे को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने रूस के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाले अमेरिकी कानून पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस कानून की समीक्षा करेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक प्रतिबंध हटाने या कानून में किसी तरह का बदलाव करने की घोषणा नहीं की है। ऐसे में उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार तक में नई चर्चा शुरू हो गई है।
दरअसल, यह विवाद उस समय सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन की ओर से रूसी डीजल के एक सौदे को लेकर मंजूरी दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि जिस कानून के तहत रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर रोक लगाई गई थी, उसे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में लागू किया गया था। अब ट्रंप के बयान ने इस कानून और उनकी सरकार की मौजूदा नीति के बीच टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
ट्रंप ने कानून पर क्या कहा?
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप से अटलांटिक महासागर के रास्ते रूसी डीजल लेकर जा रहे एक टैंकर के बारे में सवाल पूछा गया। रिपोर्टर ने उनसे जानना चाहा कि जब अमेरिकी कानून रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाता है, तो ऐसे में इस टैंकर के कार्गो को अमेरिका में उतारने की अनुमति कैसे दी जा सकती है?
शुरुआत में ट्रंप ने पूछा कि क्या यह प्रतिबंध जोन्स एक्ट के तहत आता है। इसके बाद पत्रकार ने स्पष्ट किया कि सवाल 2022 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित किए गए उस कानून से संबंधित है, जिस पर तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हस्ताक्षर किए थे।
इस पर ट्रंप ने कहा, “शायद यही बात इस कानून को काफी खराब बनाती है। मैं इसे जरूर देखूंगा।”
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि वह कानून की समीक्षा करने के पक्ष में हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि समीक्षा कब तक होगी और क्या उनकी सरकार प्रतिबंध में ढील देने की योजना बना रही है।
2022 में क्यों लगाया गया था रूसी तेल पर प्रतिबंध?
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए थे। इसी रणनीति के तहत 8 अप्रैल 2022 को रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इस कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को सीमित करना था, ताकि उसकी सैन्य गतिविधियों और यूक्रेन में जारी युद्ध पर आर्थिक दबाव बनाया जा सके।
कानून के तहत अमेरिकी टैरिफ शेड्यूल के चैप्टर 27 में वर्गीकृत रूसी उत्पादों के आयात पर रोक लगाई गई। इसका मतलब है कि रूसी पेट्रोलियम उत्पादों को अमेरिका में लाने पर कानूनी प्रतिबंध लागू होता है।
प्रतिबंध हटाना इतना आसान नहीं, कांग्रेस की भी भूमिका
रूसी तेल पर लगे प्रतिबंध को खत्म करने के लिए कानून में एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के पूरा होने का प्रमाण देना होगा।
इन शर्तों में यूक्रेन की सहमति से रूस की सैन्य वापसी और शत्रुता समाप्त करने से जुड़ा समझौता शामिल है। इसके अलावा यह भी प्रमाणित करना होगा कि नाटो सदस्य देशों के लिए रूस की ओर से तत्काल सैन्य खतरा मौजूद नहीं है और यूक्रेन के नागरिकों के पास अपनी सरकार चुनने का अधिकार सुरक्षित है।
इस प्रक्रिया में अमेरिकी कांग्रेस की संबंधित समितियों से परामर्श करना भी जरूरी है। राष्ट्रपति द्वारा आवश्यक प्रमाणन प्रस्तुत किए जाने के बाद 90 दिनों की अवधि निर्धारित है। इसके बाद प्रतिबंध समाप्त हो सकता है, बशर्ते कांग्रेस उसे रोकने के लिए प्रस्ताव पारित न करे।
यानी राष्ट्रपति के केवल बयान देने से यह प्रतिबंध अपने आप खत्म नहीं हो सकता।
न्यू जर्सी की गवर्नर ने भी उठाए सवाल
इस पूरे विवाद में न्यू जर्सी की गवर्नर मिकी शेरिल की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ट्रंप के ताजा बयान से तीन दिन पहले, 2 नवंबर को उन्होंने पोर्ट और टर्मिनल संचालकों को पत्र लिखकर प्रशासन की मंजूरी पर आपत्ति जताई थी।
मिकी शेरिल का कहना था कि रूसी पेट्रोलियम के आयात को मंजूरी देना सीधे तौर पर संघीय कानून के खिलाफ है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अमेरिकी प्रशासन को लाइसेंस जारी करके इस प्रतिबंध को अपनी मर्जी से माफ करने का अधिकार नहीं दिया गया है।
उनकी आपत्ति ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब सवाल केवल रूस से डीजल आयात का नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकारों और कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानून के पालन का भी है।
ट्रंप के सामने बढ़ सकती हैं राजनीतिक मुश्किलें

रूसी तेल आयात का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में ट्रंप प्रशासन पहले से ही राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। मिडटर्म चुनाव में झटके के बाद विपक्षी डेमोक्रेट्स की ओर से ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।
फिलहाल ट्रंप ने रूसी पेट्रोलियम पर प्रतिबंध हटाने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है। उन्होंने सिर्फ कानून की समीक्षा करने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या रूस से जुड़े ऊर्जा व्यापार को लेकर अमेरिका की नीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।


