Political Controversy : स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर हमला, महिलाओं के सम्मान को लेकर उठाए सवाल
स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, महिलाओं के सम्मान को लेकर उठाए सवाल; बोलीं- ऐसी सोच रखने वालों को किनारे करना जरूरी

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर महिलाओं के प्रति उनके कथित रवैये को लेकर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी ने उनके बयानों और महिलाओं के सम्मान से जुड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति किसी भी तरह की दकियानूसी सोच और अपमानजनक भाषा को समाज में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
स्मृति ईरानी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरएसएस, महिलाओं की स्थिति और विपक्षी नेताओं की बयानबाजी को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में संगठन, देश की स्थिति और राष्ट्रीय चुनौतियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए।
राहुल गांधी की टिप्पणी पर स्मृति ईरानी ने जताई आपत्ति
स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी की आरएसएस को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं के प्रति उनके रवैये को उनके बयानों और व्यवहार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाए।
ईरानी ने कहा कि यदि कोई नेता महिलाओं के प्रति लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां करता है, तो इस विषय पर महिलाओं से बार-बार प्रतिक्रिया मांगने के बजाय ऐसे बयानों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, महिलाओं के सम्मान का मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि यदि राहुल गांधी महिलाओं के प्रति ऐसी सोच रखते हैं, तो समाज का कर्तव्य है कि इस तरह की मानसिकता को स्वीकार न करे। उन्होंने महिलाओं की सशक्त भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं राजनीति, सामाजिक संगठनों और अन्य क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र पहचान रखती हैं।
‘महिलाओं का अपमान किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं’
स्मृति ईरानी ने अपने बयान में कहा कि महिलाओं के खिलाफ की जाने वाली अपमानजनक टिप्पणियां किसी एक संगठन या राजनीतिक दल की महिलाओं तक सीमित नहीं रहतीं। उनके अनुसार, इस तरह की भाषा समाज के सभी क्षेत्रों में महिलाओं के सम्मान को प्रभावित करती है।
उन्होंने बीजेपी की महिला सदस्यों और आरएसएस से जुड़ी महिला स्वयंसेविकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएं सशक्त हैं और उन्हें किसी भी राजनीतिक बहस में अपमान का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। ईरानी ने राहुल गांधी पर सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी करने का आरोप भी लगाया।
हालांकि, यह स्मृति ईरानी की राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप हैं। इस विवाद पर दोनों पक्षों के बयानों को उनके संबंधित संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
राहुल गांधी ने आरएसएस पर क्या कहा था?
दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरएसएस को लेकर टिप्पणी की थी। अपने पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि संघ पुरुषों का ऐसा समूह है, जो संविधान के खिलाफ है और महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति के रूप में देखता है।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन के आसपास सामने आई। उनके बयान का केंद्र संघ की विचारधारा और महिलाओं के प्रति उसके कथित दृष्टिकोण पर सवाल उठाना था। इसके जवाब में बीजेपी ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और उनके अपने बयानों तथा व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए।
इस तरह, राजनीतिक विवाद का मुख्य मुद्दा केवल आरएसएस की विचारधारा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें महिलाओं के सम्मान, राजनीतिक भाषा और सार्वजनिक जीवन में नेताओं की जिम्मेदारी जैसे विषय भी शामिल हो गए हैं।
विजयादशमी पर मोहन भागवत ने क्या कहा?
विजयादशमी के वार्षिक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने देश की परिस्थितियों, सामाजिक चुनौतियों और राजनीतिक बदलावों को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि केवल सत्ता या शासन व्यवस्था में बदलाव होने से परिस्थितियां अपने आप नहीं बदल जातीं।
भागवत के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बावजूद अपने हितों को साधने वाली ताकतें और उनके समर्थक विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बनाए रख सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुनिया में कुछ शक्तियां अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए काम करती हैं और भारत की मजबूती उनके लिए चुनौती बन सकती है।
अपने संबोधन में भागवत ने दावा किया कि भारत, हिंदू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इन चुनौतियों के संदर्भ में समाज की भूमिका और देश की मजबूती से जुड़े विषयों पर भी बात की।
महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक बयानबाजी पर बहस
स्मृति ईरानी की टिप्पणी और राहुल गांधी के आरएसएस संबंधी बयान ने राजनीतिक विमर्श में महिलाओं के सम्मान का मुद्दा फिर से सामने ला दिया है। एक ओर राहुल गांधी ने संघ की विचारधारा पर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर स्मृति ईरानी ने उनके कथित व्यवहार और महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण को लेकर पलटवार किया।
इस पूरे विवाद में महिलाओं की समानता, सामाजिक संगठनों की विचारधारा और नेताओं की सार्वजनिक भाषा जैसे सवाल महत्वपूर्ण हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह भी जरूरी है कि बयानों को उनके मूल संदर्भ में समझा जाए और किसी भी दावे को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि की जाए।

फिलहाल, स्मृति ईरानी के तीखे बयान ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बहस को एक नया आयाम दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।



