Assam Exhumation Case: 15 साल बाद खुला राज! तीन कब्रों से निकाले गए शवों के अवशेष, DNA जांच से खुलेगा रहस्य
15 साल बाद तीन कब्रों से निकले शवों के अवशेष, DNA से खुलेगा राज

गुवाहाटी/अगरतला: असम के श्रीभूमि जिले में करीब 15 साल पुराने एक मामले ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। अदालत के आदेश के बाद सरकारी कब्रिस्तान में दफन तीन अज्ञात शवों के अवशेष कब्र से बाहर निकाले गए हैं। इन अवशेषों से हड्डियों के नमूने लेकर DNA जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे जाएंगे। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इनमें से कोई अवशेष 2011 से लापता त्रिपुरा के शिक्षक आशीष सोम के हो सकते हैं या नहीं।

2011 में अचानक लापता हुए थे आशीष सोम
आशीष सोम अगरतला के रहने वाले थे और शिक्षक के साथ लकड़ी के कारोबार से भी जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, मई 2011 में वह काम के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। इसके बाद परिवार ने उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान परिवार को कथित अपहरणकर्ताओं की ओर से फोन आने और फिरौती मांगे जाने की बात सामने आई। परिवार ने अलग-अलग मौकों पर करीब 25 लाख रुपये दिए, लेकिन इसके बावजूद सोम का कोई पता नहीं चला। बाद में जांच में उनके साथ किसी गंभीर अपराध की आशंका भी जताई गई। हालांकि, उनकी मौत की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
असम में मिले थे अज्ञात शव
आशीष सोम के लापता होने के आसपास के समय में असम के मौजूदा श्रीभूमि जिले के सोन बील इलाके से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। पहचान नहीं हो पाने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करके शव को स्थानीय सरकारी कब्रिस्तान में दफना दिया गया था।
बाद की जांच में अधिकारियों को जानकारी मिली कि उस समय आसपास तीन अज्ञात शवों को दफनाया गया था। समस्या यह थी कि जांच एजेंसियां यह तय नहीं कर पा रही थीं कि इनमें से कौन-सी कब्र उस व्यक्ति की हो सकती है, जिसकी तलाश आशीष सोम के मामले में की जा रही है।
कोर्ट के आदेश पर खोली गईं तीनों कब्रें
मामला अदालत तक पहुंचने के बाद त्रिपुरा की जिला अदालत ने तीनों कब्रों से DNA जांच के लिए नमूने लेने का आदेश दिया। इसी आदेश के तहत बुधवार को तीनों कब्रों को खोला गया।
इस कार्रवाई के दौरान त्रिपुरा पुलिस की टीम, श्रीभूमि जिला प्रशासन के अधिकारी और लापता शिक्षक के परिवार के सदस्य मौजूद रहे। अवशेषों से हड्डियों के नमूने सावधानी से एकत्र किए गए हैं। अब इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
DNA जांच से खुलेगा 15 साल पुराने रहस्य का राज
अब सबसे अहम कड़ी DNA रिपोर्ट होगी। जांच के दौरान कब्रों से मिले अवशेषों के DNA प्रोफाइल की तुलना आशीष सोम के परिवार के DNA नमूनों से की जाएगी।
अगर किसी अवशेष का DNA उनके परिवार से मेल खाता है, तो जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है और करीब डेढ़ दशक से चले आ रहे गुमशुदगी के मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं अगर DNA मैच नहीं होता है, तो जांच एजेंसियों को दूसरे संभावित सुरागों पर ध्यान देना होगा।
पहले भी हुई थी DNA जांच की कोशिश
रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले भी एक अज्ञात शव को लेकर DNA जांच कराई गई थी, लेकिन उसका प्रोफाइल आशीष सोम के परिवार के नमूनों से मेल नहीं खाया था। इसके बाद भी उनकी तलाश और मामले की जांच जारी रही।
अब तीन अन्य कब्रों से मिले अवशेषों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए अहम है क्योंकि इतने वर्षों बाद भी आशीष सोम के बारे में कोई निर्णायक जानकारी सामने नहीं आ सकी है।
परिवार को DNA रिपोर्ट का इंतजार
करीब 15 साल से अपने परिजन के बारे में स्पष्ट जानकारी का इंतजार कर रहे परिवार के लिए DNA जांच बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक यह कहना संभव नहीं है कि कब्र से मिले अवशेष आशीष सोम के ही हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियों की नजर DNA रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली जांच पर है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन तीन कब्रों का 2011 में लापता हुए शिक्षक के मामले से कोई संबंध है या नहीं।




