चीनी और गन्ने के दाम पर बिहार में सियासी घमासान, नीतीश-तेजस्वी-सम्राट चौधरी आमने-सामने
चीनी और गन्ने के दाम पर बिहार में सियासी घमासान, नीतीश-तेजस्वी-सम्राट आमने-सामने

बिहार में चीनी की बढ़ती कीमतों और गन्ना किसानों से जुड़े मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ सरकार गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने और नई चीनी मिलें लगाने की योजनाओं पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष सरकार से किसानों को उचित गन्ना मूल्य और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की मांग कर रहा है। इसी बीच नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के राजनीतिक रुख को लेकर बिहार की सियासत में चर्चा तेज है।

चीनी के दाम बढ़ने से बढ़ी चिंता
बिहार में हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज सात दिनों में चीनी के दाम 10 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं। सरकार ने इसके बाद जमाखोरी और कालाबाजारी पर नजर रखने के लिए कार्रवाई की तैयारी की है।
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहता। इसका संबंध गन्ने की कीमत, चीनी मिलों की उत्पादन लागत, मांग-सप्लाई और किसानों के भुगतान से भी जुड़ा है।
सरकार का गन्ना उद्योग पर बड़ा दांव
बिहार सरकार ने ‘बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026’ को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य में नई चीनी मिलें लगाने और बंद पड़ी मिलों को दोबारा शुरू करने की योजना है। सरकार ने 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
नई नीति के तहत निवेशकों को 40 एकड़ तक जमीन 1 रुपये की टोकन राशि पर 30 साल की लीज पर देने और नई चीनी मिलों के लिए बड़े वित्तीय प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। 5000 TCD क्षमता वाली मिल के लिए 100 करोड़ रुपये तक और 3500 TCD क्षमता वाली मिल के लिए 70 करोड़ रुपये तक के प्रोत्साहन की जानकारी सामने आई है।
किसानों के मुद्दे पर विपक्ष का हमला
गन्ने की कीमत और चीनी उद्योग को लेकर विपक्ष का फोकस किसानों की आय और भुगतान पर है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 पेराई सत्र में बिहार की चीनी मिलों ने किसानों से 572.66 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा था और करीब 96 फीसदी देय राशि का भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई थी।
ऐसे में राजनीतिक बहस का एक बड़ा सवाल यह है कि नई औद्योगिक नीति का फायदा किसानों तक कितनी तेजी और सीधे तौर पर पहुंचेगा।
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के रुख पर नजर
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बयानों को भी इस पूरे मुद्दे के राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव हाल के दिनों में सम्राट चौधरी सरकार की आर्थिक नीतियों और राज्य की वित्तीय स्थिति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
वहीं सरकार की ओर से गन्ना उद्योग में निवेश, नई मिलों और रोजगार के अवसर बढ़ाने को विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।
आगे क्या?
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार की नई गन्ना नीति का असर चीनी मिलों, किसानों और बाजार में चीनी की कीमतों पर कितना पड़ता है। अगर नई मिलें शुरू होती हैं और पुरानी मिलों की क्षमता बढ़ती है तो लंबे समय में बिहार के गन्ना क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। वहीं तत्काल चुनौती बढ़ती चीनी कीमतों को नियंत्रित करने की है।

