पाकिस्तान ने हरामी धोर इलाके में बढ़ाई गतिविधियां? ड्रोन-होवरक्राफ्ट तैनाती के दावे से बढ़ी चिंता
हरामी धोर में ड्रोन-होवरक्राफ्ट तैनाती का दावा, भारत भी कर रहा सुरक्षा मजबूत

Pakistan Harami Dhoro News: भारत-पाकिस्तान सीमा से जुड़े हरामी नाला और हरामी धोर इलाके को लेकर सुरक्षा चिंताएं एक बार फिर चर्चा में हैं। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने इस संवेदनशील समुद्री-कीचड़ वाले क्षेत्र में ड्रोन और होवरक्राफ्ट जैसी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है और नई समुद्री चौकियां तैयार की जा रही हैं। हालांकि, चीन और तुर्की की मदद से हालिया तैनाती वाले दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।

हरामी धोर क्यों है इतना संवेदनशील?
हरामी धोर और हरामी नाला भारत-पाकिस्तान सीमा के कच्छ के रण और सिंध के बीच मौजूद जटिल क्रीक क्षेत्र का हिस्सा हैं। यहां जमीन, पानी और दलदली इलाका लगातार बदलता रहता है, जिससे सीमा की निगरानी सामान्य जमीन की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
हरामी नाला भारतीय क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से लंबे समय से संवेदनशील माना जाता है। भारत सरकार ने भी हाल में इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही है। गृह मंत्री अमित शाह ने मई 2026 में कहा था कि हरामी नाला और सर क्रीक क्षेत्र को मजबूत सुरक्षा ग्रिड से सुरक्षित किया जा रहा है, जिसमें वॉचटावर, सड़क, मेडिकल सुविधाएं और आधुनिक फेंसिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
पाकिस्तान के होवरक्राफ्ट का इस्तेमाल नया नहीं
हरामी धोर से जुड़े दावों के बीच यह समझना जरूरी है कि पाकिस्तान के क्रीक क्षेत्र में होवरक्राफ्ट का इस्तेमाल पहले से रिपोर्ट होता रहा है। पाकिस्तानी मरीन से संबंधित एक पुरानी रिपोर्ट में 2000TD और 8100TD होवरक्राफ्ट के जरिए दलदली और उथले इलाकों में सैनिकों की आवाजाही का उल्लेख किया गया था।
इसलिए सिर्फ होवरक्राफ्ट की मौजूदगी को अपने आप में किसी नई सैन्य तैनाती का सबूत नहीं माना जा सकता।
चीन और तुर्की की भूमिका पर क्या पता है?
पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग काफी गहरा है और पाकिस्तान तुर्की के साथ भी रक्षा क्षेत्र में सहयोग करता है। लेकिन हरामी धोर में मौजूदा ड्रोन या नई समुद्री चौकियों की कथित तैनाती सीधे चीन-तुर्की की मदद से हुई है, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
यही वजह है कि इस खबर को फिलहाल दावे और सुरक्षा आकलन के स्तर पर देखना उचित होगा, न कि पुष्ट सैन्य तथ्य के रूप में।
भारत की सुरक्षा तैयारी भी तेज
भारत की तरफ से सर क्रीक और हरामी नाला क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार इस क्षेत्र में निगरानी और सीमा सुरक्षा के लिए वॉचटावर, कनेक्टिंग रोड, मेडिकल सुविधाएं और आधुनिक फेंसिंग विकसित की जा रही हैं।
जुलाई 2026 में भारतीय रक्षा क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्ट में सर क्रीक सेक्टर के लिए 11 उभयचर कॉम्बैट बोट्स की खरीद संबंधी प्रस्ताव का भी उल्लेख किया गया था, जिनमें से सात कच्छ के सर क्रीक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित हैं।
बढ़ सकती है समुद्री निगरानी की चुनौती
क्रीक क्षेत्र में किसी भी तरह की नई निगरानी तकनीक का इस्तेमाल भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि यहां पारंपरिक गश्त के साथ-साथ पानी और दलदली जमीन दोनों पर निगरानी करनी पड़ती है।
ड्रोन जैसी तकनीक से निगरानी क्षमता बढ़ सकती है, जबकि होवरक्राफ्ट मुश्किल भूभाग में सैनिकों और उपकरणों की आवाजाही को आसान बना सकते हैं। हालांकि, किस स्तर पर और किस उद्देश्य से पाकिस्तान ने हाल में कोई नई तैनाती की है, इसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से होना बाकी है।
निष्कर्ष
हरामी धोर-हरामी नाला क्षेत्र भारत-पाकिस्तान सीमा का बेहद संवेदनशील इलाका है। पाकिस्तान की कथित ड्रोन और होवरक्राफ्ट गतिविधियों को लेकर सामने आए दावों ने जरूर सुरक्षा चर्चा तेज कर दी है, लेकिन चीन और तुर्की की मदद से हालिया तैनाती के दावे को अभी पुष्ट तथ्य के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी। दूसरी ओर, भारत भी सर क्रीक क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है।




