राजनीति

राहुल गांधी पर अनुराग ठाकुर की टिप्पणी से गरमाई सियासत, प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर भी साधा निशाना

अनुराग ठाकुर की टिप्पणी पर भड़कीं प्रियंका गांधी, PM मोदी से पूछा सवाल

नई दिल्ली: लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता और विपक्ष के तत्कालीन नेता राहुल गांधी पर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर की टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया। ठाकुर की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या संसद में की गई यह टिप्पणी उनके कहने पर हुई थी।


संसद में जातिगत जनगणना को लेकर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, लोकसभा में केंद्रीय बजट 2024-25 पर चर्चा के दौरान जातिगत जनगणना और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का मुद्दा उठा था। राहुल गांधी लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग को प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाते रहे हैं।

बहस के दौरान बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिसे कांग्रेस ने उनकी जाति को लेकर किया गया सवाल और अपमानजनक टिप्पणी बताया। ठाकुर ने कथित तौर पर कहा कि “जिसकी जाति का पता नहीं, वह जातिगत जनगणना की बात करता है।” इस टिप्पणी के बाद सदन में विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया और माहौल गरमा गया।

राहुल गांधी ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें अपमानित किया जा रहा है, लेकिन वे जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला संसद से बाहर भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।


प्रियंका गांधी ने अनुराग ठाकुर पर साधा निशाना

अनुराग ठाकुर की टिप्पणी पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

प्रियंका गांधी ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना देश की बड़ी आबादी की मांग है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब संसद में देश की 80 प्रतिशत जनता को अपमानित किया जाएगा।

प्रियंका गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया और उनसे स्पष्ट करने को कहा कि क्या अनुराग ठाकुर की टिप्पणी प्रधानमंत्री के कहने पर की गई थी।

इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच विवाद और ज्यादा तेज हो गया।


कांग्रेस ने कहा- मुद्दा सिर्फ राहुल गांधी का नहीं

कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को केवल राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी का मामला नहीं बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी लगातार OBC, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को संसद में उठा रहे हैं और जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं का तर्क था कि अगर जातिगत जनगणना पर बहस हो रही है तो इसका जवाब राजनीतिक और नीतिगत मुद्दों पर होना चाहिए, न कि किसी सांसद की जाति पर सवाल उठाकर।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी ठाकुर की टिप्पणी की आलोचना की और कहा कि संसद में राहुल गांधी के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नाराजगी है।


राहुल गांधी ने भी सदन में दिया जवाब

अनुराग ठाकुर की टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने सदन में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे जातिगत जनगणना की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जो लोग दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के मुद्दे उठाते हैं, उन्हें अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणी के बावजूद वह सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहेंगे।

इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव भी बहस में शामिल हुए। उन्होंने भी सवाल उठाया कि संसद में किसी सांसद की जाति कैसे पूछी जा सकती है।


पीएम मोदी ने अनुराग ठाकुर के भाषण को बताया था ‘जरूर सुनने लायक’

विवाद उस समय और बढ़ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अनुराग ठाकुर के भाषण का वीडियो साझा किया।

प्रधानमंत्री ने ठाकुर के भाषण को “must hear” यानी सुनने योग्य बताया और इसे विपक्ष के कथित राजनीतिक रवैये पर निशाना साधने वाला भाषण बताया।

इसके बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर सीधे हमला बोल दिया।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा भाषण का वीडियो साझा करना और उसकी तारीफ करना संसदीय मर्यादा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब भाषण के कुछ हिस्सों को सदन की कार्यवाही से हटाया गया था।


कांग्रेस ने पीएम मोदी पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा गया कि अगर बीजेपी सांसद की टिप्पणी पर विवाद है और प्रधानमंत्री उसी भाषण को सार्वजनिक तौर पर साझा कर रहे हैं, तो इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती।

प्रियंका गांधी ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री से पूछा था कि क्या संसद में राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी उनके निर्देश पर की गई थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री द्वारा ठाकुर के भाषण को साझा किए जाने की आलोचना की और इसे संसदीय विशेषाधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बताया।


जातिगत जनगणना बनी विवाद की सबसे बड़ी वजह

इस पूरे विवाद की जड़ में जातिगत जनगणना का मुद्दा है।

राहुल गांधी और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान भी जातिगत जनगणना को बड़ा मुद्दा बनाया था। कांग्रेस का तर्क रहा है कि देश की आबादी के सामाजिक और आर्थिक हालात को बेहतर तरीके से समझने तथा नीतियां बनाने के लिए जातिगत आंकड़े जरूरी हैं।

वहीं बीजेपी और उसके नेताओं ने कांग्रेस की इस मांग पर कई बार राजनीतिक सवाल उठाए हैं।

संसद में बजट चर्चा के दौरान यही राजनीतिक मतभेद व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया और मामला काफी गरमा गया।


क्या कहा था राहुल गांधी ने?

विवाद के बाद राहुल गांधी ने कहा कि अगर उन्हें गाली या अपमान सहना पड़े तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना था कि वे देश के दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के मुद्दे उठाते रहेंगे और जातिगत जनगणना की मांग जारी रखेंगे।

राहुल गांधी का यह रुख कांग्रेस की उस व्यापक राजनीतिक रणनीति के अनुरूप था जिसमें पार्टी सामाजिक न्याय और जातिगत आंकड़ों को प्रमुख मुद्दा बना रही थी।


संसद की कार्यवाही से कुछ टिप्पणी हटाई गई

विवादित टिप्पणी के बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से यह कहा गया कि अगर भाषण में कोई आपत्तिजनक हिस्सा है तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, अनुराग ठाकुर के भाषण के कुछ हिस्सों को बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।

यही कारण रहा कि बाद में प्रधानमंत्री द्वारा भाषण का वीडियो साझा किए जाने पर कांग्रेस ने संसदीय विशेषाधिकार का मुद्दा भी उठाया।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने जिस वीडियो को साझा किया, उसमें ऐसे अंश भी थे जिन्हें सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाया गया था।


बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

इस विवाद ने एक बार फिर संसद में बीजेपी बनाम कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को तेज कर दिया।

एक तरफ बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर संसद में अनुचित भाषा और जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। दूसरी ओर कांग्रेस ने अनुराग ठाकुर की टिप्पणी को राहुल गांधी और देश की बड़ी आबादी के अपमान से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए।

दोनों दलों के बीच यह टकराव केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जातिगत जनगणना, सामाजिक न्याय और संसद की मर्यादा जैसे बड़े मुद्दों तक पहुंच गया।


प्रियंका गांधी के बयान से क्यों बढ़ा विवाद?

प्रियंका गांधी के बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सवालों के घेरे में लिया।

उनका सवाल था कि अगर संसद में ऐसी टिप्पणी हुई है तो क्या प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी थी और क्या यह उनके कहने पर हुआ था।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व से जोड़ते हुए कहा कि जातिगत जनगणना की मांग केवल कांग्रेस या राहुल गांधी की मांग नहीं है, बल्कि देश की बड़ी आबादी से जुड़ा मुद्दा है।


सियासी असर क्या हुआ?

इस विवाद के बाद जातिगत जनगणना एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई।

कांग्रेस के लिए यह मुद्दा सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी राजनीति को मजबूत करने का अवसर बना।

वहीं बीजेपी के लिए यह विपक्ष की राजनीति और संसद में भाषा के स्तर पर सवाल उठाने का मौका बना।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अनुराग ठाकुर के भाषण को साझा किए जाने के बाद विवाद और ज्यादा राजनीतिक हो गया। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री की तरफ से ठाकुर के बयान को समर्थन देने के तौर पर देखा, जबकि बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया।


निष्कर्ष

लोकसभा में राहुल गांधी पर अनुराग ठाकुर की टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। जातिगत जनगणना को लेकर शुरू हुई बहस राहुल गांधी की जाति पर टिप्पणी के आरोप, प्रियंका गांधी की तीखी प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस के सवालों तक पहुंच गई।

प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि क्या संसद में देश की बड़ी आबादी को अपमानित किया जाएगा और प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ठाकुर की टिप्पणी उनके कहने पर हुई थी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ठाकुर के भाषण का वीडियो साझा किए जाने के बाद कांग्रेस ने संसदीय विशेषाधिकार का मुद्दा भी उठाया।

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