‘इस्लामिक आतंकवाद’ पर मार्को रुबियो के बयान से विवाद, भारत ने जताई आपत्ति; 67 देशों की बैठक में छिड़ी बहस
'इस्लामिक आतंकवाद' पर मार्को रुबियो के बयान से विवाद, भारत ने जताई आपत्ति; 67 देशों की बैठक में छिड़ी बहस

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ आयोजित एक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की टिप्पणी को लेकर नई बहस छिड़ गई। बैठक में 67 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहां वैश्विक आतंकवाद, उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान ‘इस्लामिक आतंकवाद’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस शब्दावली पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ने के प्रति अपनी लंबे समय से चली आ रही नीति दोहराई।

क्या है पूरा मामला?
अमेरिका की मेजबानी में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक आतंकवाद, कट्टरपंथ, हिंसक उग्रवाद और सीमा पार आतंकी नेटवर्क से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना था।
बैठक के दौरान मार्को रुबियो के संबोधन में प्रयुक्त शब्दावली को लेकर कुछ देशों ने अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे। भारत ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि आतंकवाद की पहचान उसके कृत्यों से होनी चाहिए, न कि किसी धर्म या समुदाय से।
भारत ने क्या कहा?
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अपने रुख में कहा कि—
- आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।
- किसी भी धर्म को आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं है।
- वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
- किसी विशेष धार्मिक पहचान के बजाय आतंकी संगठनों और उनकी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
यह रुख भारत की लंबे समय से चली आ रही आधिकारिक नीति के अनुरूप माना जाता है।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
67 देशों की इस बैठक में कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श हुआ—
- अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
- सीमा पार आतंकी नेटवर्क
- ऑनलाइन कट्टरपंथ
- आतंकियों की फंडिंग रोकना
- साइबर सुरक्षा
- अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग
- उग्रवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त रणनीति
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा कूटनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील होती है।
कई देश मानते हैं कि किसी धर्म का नाम जोड़ने से गलत संदेश जा सकता है, जबकि कुछ देश विशेष विचारधाराओं की स्पष्ट पहचान की वकालत करते हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विषय पर अक्सर मतभेद देखने को मिलते हैं।
भारत का लगातार रहा है यही रुख
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कहता आया है कि—
- आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध है।
- इसे किसी धर्म, जाति या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- सभी देशों को बिना किसी दोहरे मापदंड के आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
वैश्विक सहयोग पर जोर
बैठक में शामिल देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सूचना साझा करने, वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में बहुपक्षीय सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
निष्कर्ष
अमेरिका में आयोजित 67 देशों की आतंकवाद विरोधी बैठक वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। हालांकि, ‘इस्लामिक आतंकवाद’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद ने कूटनीतिक चर्चा को नया आयाम दे दिया। भारत ने अपने स्थापित रुख के अनुरूप आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ने पर आपत्ति जताई और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक, निष्पक्ष और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।