Serbia Student Protest : सर्बिया में छात्र आंदोलन तेज, डेढ़ लाख की भीड़ से वुसिक की सत्ता पर संकट
सर्बिया में सत्ता परिवर्तन की आहट? छात्रों की रैली में उमड़ी डेढ़ लाख की भीड़, राष्ट्रपति वुसिक के सामने बड़ी चुनौती

Serbia Election: यूरोप के देश सर्बिया में चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी बेलग्रेड में छात्र आंदोलन से जुड़े संगठन की रैली में करीब डेढ़ लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक और उनकी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। छात्र संगठन ने चुनावी मैदान में उतरकर लंबे समय से सत्ता में काबिज सरकार को चुनौती दी है। ऐसे में सर्बिया की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
रेलवे स्टेशन हादसे के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद हुई थी। स्टेशन की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सरकारी निर्माण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे।
छात्रों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू किए। धीरे-धीरे यह विरोध व्यापक आंदोलन में बदल गया। इसमें उन लोगों का समर्थन भी जुड़ने लगा, जो सरकार की नीतियों और देश में भ्रष्टाचार को लेकर नाराज थे।
‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ के जरिए चुनावी मैदान में छात्र
लंबे समय तक प्रदर्शन करने के बाद छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ नाम से चुनावी विकल्प तैयार किया। उनका उद्देश्य राष्ट्रपति वुसिक की पार्टी को चुनौती देना और सरकार में बदलाव लाना है।
छात्रों ने अपने प्रचार अभियान को बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा। पैदल मार्च और साइकिल यात्राओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी मतदाताओं से संपर्क किया गया। ये इलाके सत्तारूढ़ पार्टी के पारंपरिक समर्थन वाले क्षेत्र माने जाते हैं।
आंदोलन से जुड़े छात्र भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, कानून का शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
करीब 14 साल से सत्ता में है वुसिक की पार्टी
अलेक्जेंडर वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) वर्ष 2012 से सर्बिया की राजनीति में सत्ता के केंद्र में रही है। वुसिक दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनके समर्थक विकास परियोजनाओं, सड़कों और अस्पतालों के निर्माण को सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश करते हैं।
दूसरी ओर, विपक्ष और सरकार के आलोचक भ्रष्टाचार, मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वुसिक इन आरोपों को खारिज करते हैं।
विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर भी विवाद
वुसिक ने छात्र आंदोलन और अपने विरोधियों पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने आंदोलन को ‘कलर रिवोल्यूशन’ से जोड़ते हुए दावा किया कि देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो रही है।
हालांकि, छात्र आंदोलन के समर्थक भ्रष्टाचार और जवाबदेही को अपनी प्रमुख मांग बताते हैं। ऐसे में चुनाव से पहले दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
चुनाव की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल
सर्बिया में पिछले चुनावों के बाद भी विपक्ष ने अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कुछ समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया था। इस बार भी मीडिया की स्वतंत्रता, चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर दबाव को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।
सर्बिया यूरोपीय संघ की सदस्यता का उम्मीदवार देश है। इसलिए वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव की निष्पक्षता पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
क्या छात्र आंदोलन बदल पाएगा सत्ता का समीकरण?
सर्बिया में करीब 64 लाख मतदाता हैं और संसद में 250 सीटें हैं। ऐसे में छात्र आंदोलन का चुनावी प्रदर्शन देश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, बड़ी रैली में भीड़ जुटना अपने आप में चुनावी जीत की गारंटी नहीं है। असली तस्वीर मतदान, मतदाताओं के समर्थन और अंतिम नतीजों से स्पष्ट होगी। फिलहाल, छात्र आंदोलन ने सर्बिया में भ्रष्टाचार और राजनीतिक जवाबदेही के मुद्दों को केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि यह जनसमर्थन चुनाव में कितनी सीटों में बदलता है और अलेक्जेंडर वुसिक की पार्टी को कितनी चुनौती मिलती है।



