
न्न हुई। बैठक में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक के बाद विपक्षी दलों ने देशव्यापी आंदोलन और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ी कई मांगें सामने रखीं।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला और अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी रही। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए, हालांकि उनकी पार्टी की ओर से प्रतिनिधित्व किया गया।
बैठक में किन मुद्दों पर बनी रणनीति?
INDIA गठबंधन की बैठक का मुख्य केंद्र SIR यानी Special Intensive Revision रहा। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों को लेकर सवाल उठाए और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की। बैठक के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक गठबंधन ने पुरानी मतदाता सूची के इस्तेमाल, मतदाता नाम हटाने से पहले उचित नोटिस और अपील की व्यवस्था तथा चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे उठाए।
विपक्ष की एक प्रमुख मांग बैलेट पेपर से मतदान की वापसी भी रही। इसके अलावा चुनाव आयोग के कामकाज में संस्थागत पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की मांग की गई।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर पर्याप्त जवाबदेही जरूरी है।
हालांकि ये आरोप विपक्षी दलों के राजनीतिक दावे हैं। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। आयोग ने हाल में SIR के तहत नोटिस पाने वाले कुछ मतदाताओं के लिए घर पर दस्तावेज लेने और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं की घोषणा भी की है।
‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ का ऐलान
बैठक के बाद INDIA गठबंधन ने ‘Save Democracy March’ नाम से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इसकी गतिविधियां 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित करने की योजना सामने आई है। विपक्षी दल इसे SIR और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े अपने मुद्दों को जनता के बीच उठाने के अभियान के रूप में पेश कर रहे हैं।
Reuters के अनुसार, विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई है। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवालों पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।
अखिलेश यादव क्यों नहीं पहुंचे?
बैठक में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय रही। पहले से ही यह जानकारी सामने आई थी कि वह 30 सितंबर की बैठक में शामिल नहीं होंगे। समाजवादी पार्टी की ओर से उनकी अनुपस्थिति के पीछे राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और नामांकन से जुड़े कार्यक्रम को कारण बताया गया था। उनकी जगह प्रतिनिधि के बैठक में शामिल होने की बात कही गई।
हालांकि कुछ राजनीतिक रिपोर्टों ने अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे और गठबंधन संबंधी मतभेदों के संदर्भ में भी देखा। यह एक राजनीतिक विश्लेषण है; अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से बैठक में अनुपस्थिति को कांग्रेस के साथ किसी खास विवाद से जोड़ने वाला बयान नहीं दिया है।
सिर्फ अखिलेश ही नहीं, कई बड़े नेता बैठक से दूर
अखिलेश यादव के अलावा अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं की गैरमौजूदगी ने भी बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ाई। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक एम.के. स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन भी बैठक में उपस्थित नहीं थे। अखिलेश यादव और कुछ अन्य नेताओं की ओर से प्रतिनिधियों की भागीदारी की जानकारी सामने आई।
इन अनुपस्थितियों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आई हैं। इसलिए इन्हें गठबंधन की एकता या भविष्य को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष के रूप में पेश करने के बजाय संबंधित दलों की स्थिति और आधिकारिक बयानों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
BJP ने INDIA गठबंधन पर साधा निशाना
बैठक के तुरंत बाद बीजेपी ने विपक्षी गठबंधन पर राजनीतिक हमला किया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अखिलेश यादव और अन्य प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए कहा कि गठबंधन के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल हैं। उन्होंने प्रस्तावित ‘Save Democracy March’ को ‘Save Dynasty March’ कहकर उसकी आलोचना की। यह चौहान और बीजेपी की राजनीतिक टिप्पणी थी।
बीजेपी का तर्क है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति पर ध्यान दे। दूसरी ओर INDIA गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सीधे जुड़े हैं।
SIR पर क्यों मचा है इतना विवाद?
पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग की Special Intensive Revision प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। Indian Express के अनुसार 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए थे, हालांकि इनमें मृत मतदाता, स्थानांतरित मतदाता, डुप्लीकेट प्रविष्टियां और अन्य श्रेणियां शामिल हो सकती हैं।
विपक्षी दलों ने इन आंकड़ों को लेकर मतदाता अधिकारों और सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पात्र मतदाताओं को पर्याप्त अवसर और अपील का अधिकार मिलना चाहिए।
दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित तथा डुप्लीकेट प्रविष्टियों जैसी समस्याओं को दूर करना है। आयोग ने 26 सितंबर को कुछ मतदाताओं के लिए BLO द्वारा घर पर दस्तावेज एकत्र करने और विशेष सहायता डेस्क जैसी व्यवस्थाओं की घोषणा की थी।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों पर भी चर्चा
SIR विवाद का एक और पहलू चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेदों से जुड़ा है। Indian Express की जांच के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई अवसरों पर कुछ निर्णयों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
इस रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हुआ। हालांकि चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि SIR से संबंधित प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने प्रक्रिया से संबंधित कुछ सुधारात्मक कदम भी घोषित किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट जाने की भी तैयारी
INDIA गठबंधन की आगे की रणनीति केवल सड़कों पर आंदोलन तक सीमित नहीं रहने वाली है। रिपोर्टों के अनुसार विपक्षी दल 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम से जुड़े प्रावधानों को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने पर भी विचार कर रहे हैं। साथ ही चुनाव आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवालों को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया जा रहा है।
इस तरह गठबंधन ने आंदोलन के साथ-साथ कानूनी और संसदीय रास्ते अपनाने का संकेत दिया है।
बैलेट पेपर की मांग फिर चर्चा में
INDIA गठबंधन की बैठक के बाद एक बार फिर EVM बनाम बैलेट पेपर की बहस तेज होती दिखी। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने बैठक में बैलेट से मतदान की मांग रखी। विपक्षी दल EVM प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की बात कर रहे हैं।
दूसरी तरफ बीजेपी EVM के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताती रही है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावे और राजनीतिक दृष्टिकोण अलग हैं।
क्या INDIA गठबंधन एकजुट है?
बैठक में कई प्रमुख विपक्षी नेताओं की मौजूदगी रही, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण चेहरों की अनुपस्थिति ने गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। दूसरी तरफ बैठक में शामिल दलों ने SIR और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन की घोषणा की है, जो उनके बीच कम से कम इन मुद्दों पर साझा राजनीतिक कार्यक्रम का संकेत देता है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को देखते हुए INDIA गठबंधन की आंतरिक स्थिति पर किसी अंतिम निष्कर्ष के बजाय यह कहना अधिक उपयुक्त है कि गठबंधन में साझा मुद्दों पर संयुक्त कार्रवाई की कोशिश जारी है, जबकि अलग-अलग दलों की भागीदारी और रणनीति में अंतर भी दिखाई दे रहा है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर 2 अक्टूबर से प्रस्तावित ‘Save Democracy March’ और उसके बाद की संसदीय तथा कानूनी कार्रवाई पर रहेगी। दूसरी ओर चुनाव आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया में किए जा रहे बदलाव और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी आने वाले दिनों में अहम होगी।


