धर्म/अध्यात्म

गोधूलि बेला में भूलकर भी न करें ये 5 काम, मां लक्ष्मी हो सकती हैं नाराज

हिंदू धर्म में पूरे दिन में 30 मुहूर्तो के बारे में बताया गया है। इनमें से कुछ मुहूर्तों को विशेष महत्व दिया गया है। इन्हीं में से एक है गोधूलि बेला। यह समय सूर्यास्त के आसपास का होता है। पुराने समय में जब गायें चरकर घर लौटती थीं और उनके पैरों से धूल उड़ती थी, तब के समय को गोधूलि बेला कहा जाता था।

धार्मिक शास्‍त्रों के अनुसार यह समय पूजा-पाठ, दीप जलाने और भगवान का स्मरण करने के लिए शुभ माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस समय घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहिए। कुछ कामों को इस दौरान करने से बचने की सलाह दी गई है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। चलिए जानते हैं कि इस वक्‍त क्‍या-क्‍या नहीं करना चाहिए।

इस समय भोजन करने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोधूलि बेला में भोजन करना उचित नहीं माना जाता। पुराने समय में इस दौरान पूजा और संध्या वंदन का समय माना जाता था। इसलिए लोग पहले पूजा करते थे और उसके बाद भोजन करते थे।

गोधूलि बेला में न सोएं
सूर्यास्त के समय सोना भी कई परंपराओं में अशुभ माना गया है। मान्यता है कि इस समय सोने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है और दरिद्रता आती है। इस समय आराम करने के बजाय दीप जलाना, प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।

दूध या दही उधार न दें
धार्मिक मान्यताओं में दूध और दही को शुभ और पवित्र वस्तुओं में गिना जाता है। इसलिए सूर्यास्त के समय किसी को दूध या दही उधार नहीं देना चाहिए ऐसा माना जाता है कि इस समय सफेद वस्तुएं घर से बाहर देने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है।

घर में कलह-क्लेश न करें
सूर्यास्त के समय घर का वातावरण शांत रखना चाहिए । इस दौरान किसी से झगड़ा करना, गुस्सा करना या ऊंची आवाज में बोलना अच्छा नहीं माना जाता।मान्यता है कि शांत और प्रसन्न वातावरण में मां लक्ष्मी का वास होता है।

सूर्यास्त के समय झाड़ू न लगाएं
धार्मिक परंपरा में शाम के समय झाड़ू लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि सूर्यास्त के समय घर में झाड़ू लगाने से मां लक्ष्मी घर से चली जाती हैं। पुराने समय में शाम होते ही घर के जरूरी काम पहले पूरे कर लिए जाते थे। आज भी चाहें तो घर की सफाई सूर्यास्त से पहले की जा सकती हैं।

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