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सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकार की सख्ती, संवेदनशील कंटेंट हटाने की समयसीमा 2 घंटे; जानें नए नियम

2 घंटे में हटाना होगा संवेदनशील कंटेंट, जानें सरकार के नए नियम

भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गैरकानूनी और संवेदनशील ऑनलाइन कंटेंट को लेकर नियमों को और सख्त किया है। नए प्रावधानों के तहत कुछ खास श्रेणी के कंटेंट की शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया कंपनियों को 2 घंटे के भीतर उसे हटाने या उसकी पहुंच रोकने के लिए उचित कदम उठाने होंगे। हालांकि, यह 2 घंटे की समयसीमा हर विवादित या संवेदनशील पोस्ट पर लागू नहीं होती, बल्कि IT Rules में बताई गई विशेष श्रेणियों के कंटेंट के लिए है।

2 घंटे में कौन-सा कंटेंट हटाना होगा?

IT Rules के तहत अगर किसी व्यक्ति की शिकायत से जुड़ा कंटेंट निजी अंगों को दिखाता है, पूर्ण या आंशिक नग्नता दिखाता है, किसी व्यक्ति को यौन गतिविधि में दर्शाता है या इलेक्ट्रॉनिक रूप से उसकी पहचान की नकल/impersonation करता है, तो प्लेटफॉर्म को शिकायत मिलने के 2 घंटे के भीतर उसे हटाने या एक्सेस रोकने के लिए उचित और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। इसमें AI से बनाए या मॉर्फ किए गए आपत्तिजनक फोटो भी शामिल हो सकते हैं।

सरकार ने 20 फरवरी 2026 से लागू संशोधनों के जरिए ऐसे संवेदनशील कंटेंट के लिए पहले मौजूद 24 घंटे की समयसीमा को घटाकर 2 घंटे किया है।

हर विवादित पोस्ट के लिए 2 घंटे का नियम नहीं

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सोशल मीडिया पर मौजूद हर विवादित, आलोचनात्मक या संवेदनशील पोस्ट को सिर्फ 2 घंटे में हटाने का सामान्य नियम नहीं है।

सरकार के अनुसार अन्य गैरकानूनी कंटेंट के मामले में, यदि अदालत का आदेश या संबंधित सरकारी प्राधिकरण की उचित कारण वाली सूचना मिलती है, तो प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने या उसकी पहुंच रोकने के लिए 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

AI और Deepfake कंटेंट पर भी सख्ती

नए नियमों में AI-generated और synthetically generated information को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने डीपफेक, AI से बनाए गए भ्रामक कंटेंट और पहचान की गलत प्रस्तुति से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ाई है।

प्लेटफॉर्म्स को वैध AI-generated कंटेंट की स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेस करने योग्य मेटाडेटा जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना होगा, ताकि यूजर्स को पता चल सके कि कोई सामग्री सिंथेटिक तरीके से बनाई गई है।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खास जोर

सरकार के नए कदमों का एक बड़ा उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा मजबूत करना है। नियमों में बच्चों के लिए हानिकारक, अश्लील, निजता का उल्लंघन करने वाले और गैरकानूनी कंटेंट को लेकर इंटरमीडियरी कंपनियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

सरकार ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय और जहां जरूरी हो, ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करना होगा।

नियम नहीं माने तो क्या होगा?

IT Rules के तहत निर्धारित कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करने पर इंटरमीडियरी कंपनियों को IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा (safe harbour protection) खोने का जोखिम हो सकता है। इसके बाद कानून के तहत अन्य कार्रवाई या अभियोजन की स्थिति बन सकती है।

निष्कर्ष

सरकार के नए प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया पर डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज, गैर-सहमति वाली निजी तस्वीरों और अन्य गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। लेकिन 2 घंटे की समयसीमा को हर विवादित पोस्ट पर लागू मानना सही नहीं होगा—यह खास तौर पर IT Rules में परिभाषित संवेदनशील कंटेंट की शिकायतों के लिए है। वहीं सरकारी या अदालत के आदेश से जुड़े अन्य गैरकानूनी कंटेंट के लिए 3 घंटे की समयसीमा लागू है।

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