क्या धर्मेंद्र प्रधान छोड़ेंगे कुर्सी? सरकार से दौर की वार्ता से पहले CJP का बड़ा ऐलान, ‘इस्तीफा नहीं… तो मीटिंग नहीं’
CJP का सरकार को अल्टीमेटम: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं तो तीसरे दौर की वार्ता नहीं, शिक्षा मंत्री पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली। कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के साथ प्रस्तावित तीसरे दौर की वार्ता से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लिए “नॉन-नेगोशिएबल” (असमझौतावादी) मांग है।

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक सरकार के साथ अगली बैठक का कोई औचित्य नहीं है।
CJP ने सरकार के सामने रखी सख्त शर्त
तीसरे दौर की बातचीत से पहले CJP ने अपना रुख और कड़ा कर दिया है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही की नैतिक जिम्मेदारी तय किए बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
प्रवक्ता के अनुसार—
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहली और सबसे अहम मांग है।
- इसे किसी भी स्थिति में बातचीत का हिस्सा बनाकर टाला नहीं जा सकता।
- जब तक इस मांग पर कार्रवाई नहीं होगी, सरकार से अगली बैठक नहीं होगी।
सोशल मीडिया पर क्या कहा?
आशुतोष रांका ने एक्स पर साझा किए गए संदेश में लिखा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा “नॉन-नेगोशिएबल” है। उनके अनुसार छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
आंदोलन का केंद्र क्या है?
CJP और प्रदर्शनकारी छात्र लंबे समय से विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच।
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
- परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।
- छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।
सरकार की क्या है तैयारी?
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सरकार लगातार यह कहती रही है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि तीसरे दौर की वार्ता होती है तो उसमें शिक्षा सुधार और छात्रों की मांगों पर चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
CJP के इस नए रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल पहले से ही शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार बातचीत का नया रास्ता तलाशती है या गतिरोध और बढ़ता है।
छात्रों की नजर तीसरे दौर की वार्ता पर
देशभर के प्रतियोगी छात्रों की निगाहें अब सरकार और आंदोलनकारी संगठन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
तीसरे दौर की वार्ता से पहले CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी सबसे बड़ी शर्त बताते हुए सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुल पाता है।



