मड़ुआ की रोटी और इसके फायदे

पौष्टिकता से भरपूर मडुवा की रोटी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक आहार के रूप में खाई जाती है. मडुवे की रोटी बनाने की आसान विधि से घर पर यह स्वादिष्ट और सेहतमंद रोटी बनाई जा सकती है. मडुआ को आम भाषा में रागी कहा जाता है, इस नाम से तो ज्यादातर लोग वाकिफ होंगे। कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर मडुआ आपकी सेहत के लिए कमाल कर सकता है।मडुआ के केवल धार्मिक महत्व नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसके कई फायदे हैं। मडुआ को आम भाषा में रागी कहा जाता है, इस नाम से तो ज्यादातर लोग वाकिफ होंगे।
- वजन कम करने में मददगार है
मडुआ का आता वेट लॉस में आपकी मदद कर सकता है। यदि आप बढ़ते वजन से परेशान हैं, और डाइटिंग पर हैं, तो इसकी रोटी को अपनी नियमित डाइट में शामिल करें। वही कभी-कभी स्वाद बदलने के लिए मडुआ से डोसा और इडली भी तैयार की जा सकती है। इसमें बेहद कम मात्रा में फैट होता है, और कैलोरी की भी सीमित मात्रा पाई जाती है। इस प्रकार यह बढ़ते वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
- डायबिटीज में बेहद कारगर होता है
डायबिटीज के मरीजों के लिए मडुआ के आटे से बने व्यंजन किसी दवाई से कम नहीं होते। इनमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है और यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रुकती है। विशेष रूप से इसे खाने के बाद बार-बार भूख नहीं लगाती, जिससे कि डायबिटीज की स्थिति में लोग सीमित मात्रा में भोजन करते हैं। इतना ही नहीं यह ग्लूटेन फ्री है, इसलिए यह अधिक फायदेमंद हो जाति है। डायबिटीज के मरीजों को दिन में एक बार राजी से बनी रोटी जरूर खानी चाहिए।
- हड्डियों को मजबूत बनाएं
30 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती है, इसलिए उन्हें अपनी सेहत के अनुरूप डाइट प्लान करना चाहिए। मडुआ के आटे में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, इस प्रकार इसका सेवन हड्डियों को मजबूती देता है और हेल्दी बोन डेंसिटी बनाए रखता है। वहीं यदि किसी को हड्डियों में दर्द की समस्या रहती है, तो उन्हें मडुआ के आटे से बनी रोटी जरूर खानी चाहिए।
- एनीमिया को ट्रीट करता है मडुआ
महिलाओं में आमतौर पर एनीमिया देखने को मिलता है। प्रेगनेंसी के दौरान और इसके बाद साथ ही कई अन्य ऐसी स्थितियां हैं, जिसमें महिलाओं की शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। जिसकी वजह से उन्हें कमजोरी तथा अन्य शारीरिक लक्षणों का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में आयरन से भरपूर मडुआ का आटा आपकी मदद कर सकता है। मडुआ के आटे से बनी रोटी के साथ हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, नियमित रूप से इनके सेवन से कुछ दिनों में ही आपको बेहतर महसूस होगा।
- पाचन समस्याओं को दूर करे
मडुआ के आटे में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इस प्रकार इसका नियमित सेवन पाचन क्रिया को पूरी तरह से सक्रिय रखता है। वहीं गैस, ब्लोटिंग, कब्ज आदि जैसी पाचन संबंधी समस्याओं के खतरे को कम कर देता है।
- लेक्टेटिंग मदर्स के लिए फायदेमंद है
जो महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग करवा रही हैं, उनके लिए मडुआ का आता किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें कई ऐसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो महिलाओं में ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ा देते हैं। मडुआ की रोटी के साथ-साथ हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फलों का सेवन करें, इस प्रकार आपकी शरीर में फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन एवं मिनरल्स की मात्र बनी रहती है। वहीं आप पूरी तरह से स्वस्थ रहती हैं।
अगर आपके पास ताजा मंडुवा का आटा उपलब्ध नहीं है. तो आप मंडुवा के दाने को घर पर भी पीस सकते हैं. इसके लिए मंडुवा के बीज को अच्छी तरह से साफ करके सुखा लें, और फिर अच्छी ग्राइंडर में पीसकर आटा बना लें. मंडुवा का आटा मिलने पर उसे उपयोग करने से पहले छलनी से छान लें ताकि उसमें छोटे-छोटे कण न रहें. ऐसा करने से रोटी बेलने में आसानी होती है, और रोटी पतली व फूली बनती है. इस आटे में आयरन, प्रोटीन, विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं….
मंडुवा की रोटी बनाने के लिए मंडुवा के आटे में हल्का नमक डालें और धीरे-धीरे पानी मिलाकर गूंधना शुरू करें. ध्यान रखें कि आटा न बहुत सख्त हो और न बहुत नरम. ऐसा गूंधें कि वह बेलने लायक मजबूती के साथ नरम हो. एक अच्छा गूंधा आटा रोटी को पतला और फूला बनाने में मदद करता है. आटे को लगभग 10-15 मिनट के लिए ढककर रखें ताकि वह अच्छी तरह से सेट हो जाए. इससे रोटी का स्वाद भी बेहतर होता है, और उसे बेलते समय टूटने की समस्या नहीं आती.




