PM Modi News : चुनाव परिणाम आते ही मोदी का कांग्रेस पर निशाना, बयान से गरमाई राजनीति
बैलेट पेपर से चुनाव में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला, पीएम मोदी के तंज से गरमाई सियासत

MLC Election Result 2026: चार राज्यों में विधान परिषद की सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। अब बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों में पार्टी को मिली निराशा के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनावी नतीजों को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा। इस मुद्दे ने एक बार फिर चुनाव प्रणाली, विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन को लेकर बहस छेड़ दी है।
बैलेट पेपर से चुनाव, फिर भी कांग्रेस को नहीं मिली जीत
उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया आयोजित की गई। इन सीटों पर शिक्षकों और स्नातकों के निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधियों का चुनाव किया गया। मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई।
28 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इन चुनावों में कांग्रेस को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि, सभी सीटों के नतीजे एक ही समय पर घोषित नहीं हुए थे और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना जारी थी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को भी सफलता मिली।
इन्हीं नतीजों को लेकर भाजपा ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। पार्टी का तर्क है कि जब मतदान बैलेट पेपर से हुआ, तब भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति और चुनावी प्रदर्शन से जोड़कर देखा।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर किस बात को लेकर कसा तंज?
विधान परिषद चुनाव के परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कांग्रेस पर टिप्पणी चर्चा में रही। भाजपा ने कांग्रेस की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को चुनावी नतीजों के संदर्भ में उठाया और विपक्षी पार्टी पर निशाना साधा।
भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव में जीत हासिल करने के लिए किसी व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय पार्टी को मतदाताओं के बीच अपना समर्थन मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, चुनावी नतीजे किसी एक चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता का अपने आप अंतिम प्रमाण नहीं होते। मतदान की व्यवस्था और चुनावी परिणामों का मूल्यांकन तथ्यों तथा संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।
कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन का प्रदर्शन
कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के चुनाव में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा ने तीन सीटें अपने नाम कीं, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। इस नतीजे को कांग्रेस के लिए झटका माना गया, क्योंकि राज्य में उसकी सरकार है। भाजपा और जेडीएस नेताओं ने परिणाम को कांग्रेस के लिए राजनीतिक संदेश बताते हुए उस पर हमला बोला।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी चुनावी मुकाबला
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव हुए। शुरुआती और घोषित नतीजों में भाजपा तथा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। वहीं, बिहार में आठ सीटों पर चुनावी मुकाबला हुआ। यहां भाजपा, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी सहित विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने सफलता दर्ज की।
महाराष्ट्र में भी विधान परिषद की सीटों के लिए मतगणना जारी थी। इन चुनावों में शिक्षकों और स्नातकों के निर्वाचन क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इन मतदाताओं की पसंद को समझना राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनावों की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
क्या इन नतीजों से ईवीएम पर बहस खत्म हो जाएगी?

विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने ईवीएम और बैलेट पेपर को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। भाजपा इन परिणामों को कांग्रेस के लिए चुनौती बता रही है, जबकि चुनावी प्रदर्शन का वास्तविक आकलन उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, मतदाता समूहों और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
इन चुनावों से कांग्रेस की रणनीति पर सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन केवल इन नतीजों के आधार पर देशभर में पार्टी की स्थिति या चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




