राजनीति

दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन: जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 11 मेट्रो स्टेशन बंद; मोबाइल इंटरनेट पर भी असर

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 11 मेट्रो स्टेशन बंद; इंटरनेट पर भी असर

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026: गांधी जयंती के दिन राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ विभिन्न छात्र संगठनों और अन्य समूहों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही और सुरक्षा के मद्देनजर नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की।

स्थिति को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद कर दिया। साथ ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं प्रभावित/निलंबित होने की रिपोर्ट सामने आई। पुलिस ने बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों हुआ?

प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया है। आयोजकों और प्रदर्शन में शामिल समूहों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। इन्हीं आरोपों के आधार पर प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के आरोप प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों के दावे हैं। चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने तथा अयोग्य, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी

दिल्ली पुलिस ने कहा कि 2 अक्टूबर के लिए जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद कई संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के वहां पहुंचने के बाद पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। Indian Express के अनुसार प्रदर्शन का आह्वान AISA, राज्यसभा सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण से जुड़े समूहों की ओर से किया गया था।

पुलिस ने कानून-व्यवस्था और यातायात को देखते हुए एहतियाती कदम उठाने की बात कही।

धारा 163 लागू, बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात

नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई। इसके तहत अनधिकृत सभाओं और निर्धारित प्रतिबंधों के उल्लंघन पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भी तैनाती की गई।

रिपोर्टों के अनुसार हजारों लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा को कई स्तरों पर बढ़ाया गया था। प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए और वाहनों तथा पैदल आने-जाने वालों की निगरानी की गई।

500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

दिन बढ़ने के साथ प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। Business Standard की PTI आधारित रिपोर्ट के मुताबिक 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें AAP के नेता सौरभ भारद्वाज, संजीव झा, आतिशी और संजय सिंह सहित विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल थे।

प्रदर्शनकारियों की ओर से कहा गया कि वे अपनी मांगों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं। दूसरी ओर पुलिस ने बिना अनुमति आयोजित सभा को रोकने के लिए कार्रवाई की।

AAP नेताओं को भी हिरासत में लिया गया

जंतर-मंतर पर पहुंचे AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। AAP ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और पार्टी को अपनी बात रखने का अधिकार है। पुलिस की ओर से कहा गया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब कई विपक्षी और छात्र समूह SIR तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक अभियान चला रहे हैं।

दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशन बंद

प्रदर्शन के मद्देनजर DMRC ने 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद करने की घोषणा की। प्रभावित स्टेशनों में:

जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं।

हालांकि इन सभी स्टेशनों पर मेट्रो ट्रेन की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं थी। DMRC के अनुसार राजीव चौक, मंडी हाउस, INA, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध रही।

आपके दिए इनपुट में 12 स्टेशनों का उल्लेख है, लेकिन DMRC और Indian Express की उपलब्ध रिपोर्ट में 11 स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद होने की पुष्टि है। इसलिए खबर में 11 का आंकड़ा इस्तेमाल करना अधिक सटीक है।

मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित

जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवा को लेकर भी प्रतिबंध की खबर सामने आई। Moneycontrol के मुताबिक 1.5 किलोमीटर के दायरे में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक इंटरनेट सेवा निलंबित करने के आदेश की जानकारी सामने आई। दूसरी रिपोर्टों में इंटरनेट की गति धीमी होने और आंशिक व्यवधान की भी बात कही गई।

इससे इलाके में डिजिटल भुगतान, कैब सेवाओं और ऑनलाइन संचार पर भी असर पड़ने की संभावना रही। हालांकि इंटरनेट प्रतिबंध की प्रशासनिक अधिसूचना की सार्वजनिक उपलब्धता को लेकर अधिकार समूहों ने सवाल उठाए हैं।

यातायात पर भी पड़ा असर

जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के कारण राजधानी के मध्य हिस्से में यातायात को भी नियंत्रित किया गया। Connaught Place, Patel Chowk, Tolstoy Marg, Jantar Mantar Road और Parliament Street जैसे इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन और नियंत्रित आवाजाही की सूचना दी गई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से प्रभावित रास्तों से बचने और यात्रा की योजना पहले से बनाने की सलाह दी।

ऐसे में गांधी जयंती पर राजघाट और विजय घाट में होने वाले कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रदर्शन के कारण केंद्रीय दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी रही।

प्रदर्शन के केंद्र में SIR विवाद

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। प्रदर्शनकारी समूहों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं और चुनाव आयोग को प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

दूसरी तरफ चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद के रूप में देखता है। इसलिए मौजूदा विवाद में आरोप और आधिकारिक पक्ष अलग-अलग हैं, और अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित दस्तावेजों और चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी को देखना जरूरी है।

विरोध प्रदर्शन का राजनीतिक संदर्भ

यह प्रदर्शन केवल एक दिन की घटना नहीं है। पिछले कुछ समय से विपक्षी दल और विभिन्न नागरिक एवं छात्र संगठन चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। INDIA गठबंधन की पिछली बैठक में भी SIR और चुनावी पारदर्शिता को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई थी और विपक्षी दलों ने संयुक्त अभियान की घोषणा की थी।

हालांकि आज का जंतर-मंतर प्रदर्शन कई अलग-अलग संगठनों की भागीदारी वाला कार्यक्रम था और इसे केवल एक राजनीतिक गठबंधन की गतिविधि के रूप में देखना जरूरी नहीं है।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग

मौजूदा स्थिति में दो पक्षों की प्राथमिकता अलग दिखाई देती है। प्रदर्शनकारी इसे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल उठाने का माध्यम बता रहे हैं, जबकि पुलिस का फोकस बिना अनुमति भीड़, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने पर है।

इसी कारण दिल्ली में धारा 163, मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसे कदम उठाए गए।

आगे क्या?

जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदर्शन से जुड़े संगठन आगे किस तरह की कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई करते हैं और चुनाव आयोग SIR को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों का किस तरह जवाब देता है।

फिलहाल राजधानी के लिए सबसे बड़ा व्यावहारिक मुद्दा यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा असर है। यात्रियों को केंद्रीय दिल्ली के प्रभावित क्षेत्रों में जाने से पहले मेट्रो और ट्रैफिक की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

निष्कर्ष

2 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का जंतर-मंतर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शन का केंद्र रहा। प्रदर्शनकारियों ने SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कहते हुए BNSS की धारा 163 लागू की और कई लोगों को हिरासत में लिया।

सुरक्षा कारणों से 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद किए गए और जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध/व्यवधान की रिपोर्ट सामने आई। 500 से अधिक हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

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