Stock Market Crash Today: अमेरिका-ईरान तनाव और रुपये की कमजोरी से शेयर बाजार में हाहाकार, Sensex 600 अंक तक टूटा
अमेरिका-ईरान तनाव से Sensex 600 अंक टूटा, ₹4 लाख करोड़ डूबे

वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद को लेकर अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। 29 सितंबर 2026 को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 582 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी भी 22,700 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती गिरावट के दौरान बाजार पूंजीकरण में करीब ₹4 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।

अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण निवेशकों में जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी है। पश्चिम एशिया में स्थिति बिगड़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती हैं। यही वजह है कि महंगे क्रूड को भारतीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम माना जा रहा है।
रुपया 96 के आसपास, बढ़ी चिंता
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। 28 सितंबर को रुपया 96.03 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो पिछले बंद भाव से 28 पैसे कमजोर था। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव, महंगा क्रूड और वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।
रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था के आयात खर्च पर पड़ सकता है। इससे निवेशकों की धारणा भी प्रभावित हो सकती है।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर दबाव
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। HDFC Bank, Kotak Mahindra Bank, M&M, Tata Steel और Bajaj Finance जैसे शेयर दबाव में रहे। शुरुआती कारोबार में बाजार के अधिकांश प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी वजह
भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी दबाव बढ़ा रही है। 28 सितंबर को FII ने भारतीय इक्विटी से करीब ₹3,693.93 करोड़ की शुद्ध निकासी की थी। इसके साथ ही अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने भी भारतीय शेयरों पर दबाव बनाया।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव के पीछे एक ही कारण नहीं है। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां—इन सभी पर बाजार की नजर बनी हुई है।
फिलहाल निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता और आधिकारिक बाजार जानकारी को ध्यान में रखना जरूरी है।




