Vande Mataram Controversy: राजनीति में फिर गरमाया ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा, सियासी दलों में तीखी बयानबाजी
राजनीति में फिर गरमाया वंदे मातरम् का मुद्दा, दलों में तीखी बयानबाजी

देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना से जुड़े ऐतिहासिक गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीति में एक बार फिर विवाद गरमा गया है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने अपने-अपने तर्क रखते हुए एक-दूसरे पर निशाना साधा है।

‘वंदे मातरम्’ पर क्यों छिड़ी बहस?
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। आजादी के आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना की भावना मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसी ऐतिहासिक महत्व को लेकर जब राजनीतिक मंचों पर ‘वंदे मातरम्’ का जिक्र होता है, तो इसका असर केवल सांस्कृतिक मुद्दे तक सीमित नहीं रहता। अलग-अलग दल इसे अपने राजनीतिक और वैचारिक नजरिए से देखते हैं।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ जहां इसे राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति से जुड़ा विषय बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की ओर से सरकार पर इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
दोनों पक्षों के नेताओं के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है।
इतिहास से जुड़ा है ‘वंदे मातरम्’
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बन गया था।
भारत की आजादी के बाद ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला, जबकि ‘जन गण मन’ को राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया गया।
विवाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज
वर्तमान विवाद में नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ऐसे ऐतिहासिक और भावनात्मक मुद्दे अक्सर राजनीति में व्यापक बहस का रूप ले लेते हैं। आने वाले दिनों में अलग-अलग दलों के नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर और बयान सामने आने की संभावना है।
निष्कर्ष
‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने ला दिया है। एक तरफ इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर इसके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।



