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संसद में गतिरोध खत्म करने की कोशिश तेज, अमित शाह के बयान पर सरकार की शर्त; FCRA बिल पर विपक्ष में मतभेद

छात्र आंदोलन पर अमित शाह के बयान की शर्त, FCRA Bill पर विपक्ष में दो फाड़

संसद के मानसून सत्र में लगातार बने गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत तेज हो गई है। सरकार की ओर से छात्र आंदोलन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान/बहस की पेशकश की गई है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। दूसरी ओर FCRA संशोधन बिल को लेकर विपक्षी खेमे में भी पूरी एकजुटता नजर नहीं आ रही है।

छात्र आंदोलन पर अमित शाह के बयान को लेकर क्या है मामला?

मानसून सत्र के दौरान छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष लगातार उठा रहा है। विपक्ष की मांग है कि सरकार इस पूरे मामले पर सदन में जवाब दे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट करे।

इसी गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह को छात्र आंदोलन पर बोलने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, विपक्ष ने इसे पर्याप्त नहीं माना और अपनी दूसरी मांगों को भी चर्चा में शामिल करने पर जोर दिया है।

सरकार और विपक्ष के बीच क्यों नहीं बन रही सहमति?

सरकार चाहती है कि संसद में जारी टकराव खत्म हो और लंबित विधायी काम आगे बढ़े। वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर एक साथ चर्चा और सरकार से जवाब मांग रहा है।

इनमें Gen Z/छात्र आंदोलन, राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों से जुड़ा विवाद और FCRA संशोधन बिल प्रमुख मुद्दे हैं। सरकार का प्रस्ताव था कि छात्र आंदोलन पर चर्चा के जरिए गतिरोध तोड़ा जाए, लेकिन विपक्ष ने अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की मांग रखी है।

FCRA बिल पर विपक्ष में दिखी दरार

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर विपक्षी दलों के बीच भी पूरी तरह एक राय नहीं दिख रही है। कांग्रेस ने प्रस्तावित बिल का विरोध करने का ऐलान किया है और आरोप लगाया है कि इसके जरिए NGOs और विदेशी फंडिंग से जुड़े संगठनों पर ज्यादा कड़े नियंत्रण लगाए जा सकते हैं।

हालांकि विपक्षी खेमे के सभी दलों का रुख एक जैसा नहीं है। ऐसे में FCRA बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी एकजुटता की परीक्षा भी हो सकती है।

मानसून सत्र पर मंडरा रहा है ‘वॉशआउट’ का खतरा

संसद का मानसून सत्र अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है और लगातार हंगामे के कारण कामकाज प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, सत्र के बचे हुए समय में सरकार की प्राथमिकता गतिरोध खत्म कर महत्वपूर्ण बिलों और दूसरे विधायी कामों को आगे बढ़ाना है।

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं से संपर्क कर सदन चलाने के लिए सहयोग मांगा था। सरकार की कोशिश है कि कम से कम बचे हुए दिनों में संसद की कार्यवाही सामान्य हो सके।

विपक्ष की रणनीति भी अहम

विपक्ष का कहना है कि केवल एक मुद्दे पर चर्चा से गतिरोध खत्म नहीं होगा। वह छात्रों के प्रदर्शन के साथ-साथ राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर भी सरकार से जवाब चाहता है।

ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की शर्तों और विपक्ष की मांगों के बीच समझौता होता है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

निष्कर्ष

संसद के मानसून सत्र में गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार ने छात्र आंदोलन पर अमित शाह के बयान का रास्ता खोलने की कोशिश की है, लेकिन विपक्ष अन्य मुद्दों को भी चर्चा में शामिल कराने पर अड़ा है। वहीं FCRA बिल को लेकर विपक्षी दलों के बीच मतभेद सामने आने से सियासी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या मानसून सत्र का बाकी समय भी हंगामे की भेंट चढ़ता है।

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