संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन तोड़ने के लिए रखीं 3 अहम शर्तें; सांसदों को लिखा खुला पत्र
संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 अहम शर्तें

नई दिल्ली। लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और नवोन्मेषक सोनम वांगचुक ने संसद मार्च से पहले बड़ा ऐलान किया है। सफदरजंग अस्पताल से जारी एक पत्र में उन्होंने सांसदों के नाम संदेश भेजते हुए कहा कि वे कुछ महत्वपूर्ण शर्तें पूरी होने पर ही अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
20 दिनों से अधिक समय तक भूख हड़ताल पर रहने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब उनके इस नए संदेश ने आंदोलन को एक नई दिशा दे दी है।

सांसदों को लिखा खुला पत्र
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में देश के सांसदों से अपील की कि वे लद्दाख से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाएं। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए है।
उन्होंने संसद मार्च को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का माध्यम बताया।
अनशन तोड़ने के लिए रखीं 3 शर्तें
पत्र के अनुसार, वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं—
1. संसद में लद्दाख के मुद्दों पर गंभीर चर्चा
उन्होंने मांग की कि संसद में लद्दाख से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कर ठोस समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।
2. सरकार की ओर से लिखित आश्वासन
उन्होंने कहा कि केवल मौखिक बयान पर्याप्त नहीं होंगे। सरकार को लिखित रूप में भरोसा देना चाहिए कि उनकी प्रमुख मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।
3. शांतिपूर्ण संवाद की शुरुआत
वांगचुक ने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच औपचारिक एवं सकारात्मक संवाद शुरू करने पर जोर दिया ताकि विवाद का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से निकल सके।
स्वास्थ्य को लेकर चिंता
लगातार भूख हड़ताल के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और उनकी प्राथमिकता अब भी लद्दाख के लोगों के मुद्दे हैं।
संसद मार्च पर क्या बोले?
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि संसद मार्च लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी बात देश के जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण और कानून का पालन करते हुए आंदोलन जारी रखने की अपील भी की।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
वांगचुक के नए बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की आवश्यकता बताई है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि—
- सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
- संसद में लद्दाख का मुद्दा किस तरह उठाया जाता है।
- संसद मार्च को लेकर आगे क्या रणनीति बनती है।
- क्या उनकी शर्तों पर कोई सकारात्मक पहल होती है।
निष्कर्ष
संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक द्वारा रखी गई तीन शर्तों ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी प्राथमिकता केवल अनशन समाप्त करना नहीं, बल्कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अब सरकार और संसद की अगली प्रतिक्रिया पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।



