दक्षिण भारत से लगभग विलुप्त हुए Egyptian Vultures, वैज्ञानिकों ने जताई गंभीर चिंता
दक्षिण भारत से लगभग विलुप्त हुए Egyptian Vultures, वैज्ञानिकों ने जताई गंभीर चिंता

भारत की जैव विविधता (Biodiversity) के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। Egyptian Vulture (मिस्री गिद्ध), जिसे प्रकृति का सफाईकर्मी भी कहा जाता है, दक्षिण भारत के कई हिस्सों से लगभग गायब हो चुका है। संरक्षण विशेषज्ञों और वन्यजीव वैज्ञानिकों का कहना है कि विशेष रूप से तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में इस प्रजाति की संख्या तेजी से घटी है और कई स्थानों पर यह स्थानीय स्तर पर लगभग विलुप्त हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी संरक्षण उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में यह पक्षी दक्षिण भारत से पूरी तरह लुप्त हो सकता है।
क्या है Egyptian Vulture?
Egyptian Vulture (वैज्ञानिक नाम: Neophron percnopterus) एक दुर्लभ गिद्ध प्रजाति है, जिसे IUCN Red List में Endangered (संकटग्रस्त) श्रेणी में रखा गया है। यह पक्षी प्राकृतिक रूप से मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में यह गिद्ध लंबे समय तक कई राज्यों में पाया जाता था, लेकिन अब इसकी आबादी लगातार घट रही है।
वैज्ञानिकों की चिंता क्यों बढ़ी?
हाल के संरक्षण अध्ययनों के अनुसार दक्षिण भारत के कई इलाकों, खासकर तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में Egyptian Vulture की उपस्थिति बेहद कम रह गई है। कई पुराने प्रजनन स्थल अब खाली हो चुके हैं और सक्रिय घोंसलों की संख्या भी बहुत कम हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक पक्षी की संख्या घटने का मामला नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए चेतावनी है।
गिरती आबादी के प्रमुख कारण
वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कई कारण बताए हैं—
- पशुओं में उपयोग होने वाली कुछ जहरीली दवाओं (विशेषकर डाइक्लोफेनाक) का प्रभाव।
- बिजली की हाई-टेंशन लाइनों से टकराव।
- जहरीले पशु अवशेष खाने से मौत।
- खनन और शहरीकरण के कारण आवास (Habitat) का नष्ट होना।
- भोजन के प्राकृतिक स्रोतों में कमी।
- मानव गतिविधियों के कारण घोंसलों का प्रभावित होना।
पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं गिद्ध?
गिद्ध प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण सफाईकर्मियों में गिने जाते हैं। ये मृत पशुओं को तेजी से खाकर संक्रमण फैलने से रोकते हैं।
इनकी मौजूदगी से—
- पर्यावरण स्वच्छ रहता है।
- संक्रामक बीमारियों का खतरा कम होता है।
- आवारा कुत्तों और अन्य मृतभक्षी जानवरों की संख्या नियंत्रित रहती है।
- प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला (Food Chain) संतुलित रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्धों की कमी का सीधा असर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर पड़ सकता है।
संरक्षण के लिए क्या किए जा रहे हैं प्रयास?
वन्यजीव विशेषज्ञों ने सरकार से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग की है—
- Egyptian Vulture के लिए विशेष संरक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
- सुरक्षित प्रजनन केंद्र (Breeding Programme) विकसित किए जाएं।
- जहरीली पशु दवाओं के उपयोग पर सख्ती हो।
- बिजली की लाइनों को सुरक्षित बनाया जाए।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण अभियान से जोड़ा जाए।
- नियमित जनगणना और वैज्ञानिक निगरानी की जाए।
भारत में गिद्ध संरक्षण की स्थिति
भारत में गिद्धों की कई प्रजातियां पहले ही गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। पिछले तीन दशकों में कई प्रजातियों की आबादी में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इसी कारण देश में गिद्ध संरक्षण केंद्र, सुरक्षित प्रजनन कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
दक्षिण भारत में Egyptian Vulture की घटती संख्या पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी है। यह पक्षी केवल एक जीव नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का अहम हिस्सा है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इस दुर्लभ गिद्ध को केवल किताबों और तस्वीरों में ही देख पाएंगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि सरकार, वन विभाग और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही इस संकटग्रस्त प्रजाति को बचाया जा सकता है।



