जीवनशैली

क्यों पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर टूटता है शरीर?

एक स्वस्थ शरीर के लिए उम्र के हिसाब से 6 से 8 घंटे की अच्छी क्वालिटी वाली नींद लेना बेहद जरूरी है, लेकिन कई बार रात की नींद पूरी न होने के कारण लोग दिनभर थकावट और जरूरत से ज्यादा नींद आने की समस्या से जूझते रहते हैं।

अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो इसे केवल ‘थकान’ मानकर नजरअंदाज न करें। यह कुछ ऐसी बीमारियों या आदतों का संकेत हो सकता है, जिनकी समय पर जांच होना बहुत जरूरी है। आइए, डॉ. मोनिका महाजन (प्रिंसिपल डायरेक्टर और एचओडी, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स अस्पताल – पंचशील पार्क) से डिटेल में जानते हैं इस बारे में।

स्लीप एपनिया
अगर आपको जोर-जोर से खर्राटे लेने की आदत है और खासकर अगर आपका वजन ज्यादा है, तो आपको ‘ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया’ की समस्या हो सकती है। इस बीमारी में सोते समय जीभ पीछे की तरफ गिर जाती है और दिमाग के स्लीप सेंटर में गड़बड़ी होने लगती है। इससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे हार्ट और ब्लड प्रेशर में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है।

नतीजा यह होता है कि रात में बार-बार नींद टूटती है। रात की नींद इतनी खराब हो जाती है कि इंसान दिन में कुर्सी पर बैठे-बैठे या गाड़ी में सफर करते हुए भी सो जाता है। यह एक गंभीर समस्या है जिसका सीधा संबंध हार्ट अटैक और स्ट्रोक से पाया गया है। अगर आपको ऐसे लक्षण हैं, तो ‘स्लीप स्टडी’ कराना सही रहेगा।

जब बिगड़ जाए ‘बॉडी क्लॉक’
जो लोग रात की शिफ्ट में काम करते हैं या अक्सर ट्रैवल करते हैं, उन्हें अक्सर ‘जेट लैग’ और ‘सर्कैडियन रिदम डिसऑर्डर’ का सामना करना पड़ता है। हमारे शरीर की अपनी एक अंदरूनी घड़ी होती है। जब हमारी ‘बॉडी क्लॉक’ और बाहर की रोशनी का समय आपस में मेल नहीं खाते, तो स्लीप-वेक साइकिल पूरी तरह खराब हो जाता है। इसी वजह से दिनभर थकान और नींद हावी रहती है।

खराब स्लीप हाइजीन
आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी आपकी नींद की क्वालिटी खराब कर सकती हैं:

मोबाइल फोन: रातभर फोन की स्क्रीन पर मैसेज चेक करते रहने से स्लीप साइकिल डिस्टर्ब हो जाता है।
खान-पान: रात को सोने से पहले शराब या कॉफी का सेवन करना भी आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है।

क्या किसी बीमारी या दवा का है असर?
दिन में ज्यादा नींद आने के पीछे केवल अधूरी नींद ही नहीं, बल्कि कई अन्य शारीरिक और बाहरी कारण भी हो सकते हैं:

गंभीर बीमारियां: मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और थायरॉइड जैसी समस्याओं का सीधा कनेक्शन नींद से है। वृद्धावस्था में ‘पार्किंसंस’ के मरीजों का भी स्लीप साइकिल अक्सर बिगड़ जाता है।
खून की कमी: शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे इंसान को ज्यादा नींद आती है और थकान बनी रहती है।
दवाइयों का साइड इफेक्ट: अपनी दवाइयों की लिस्ट जरूर चेक करें। कुछ एंटी-एलर्जी और डिप्रेशन की दवाइयां ऐसी होती हैं, जो हमारी नींद में रुकावट डालती हैं और दिन में नींद और थकान का कारण बनती हैं।
मौसम का असर: मौसम की चरम स्थितियां यानी बहुत ज्यादा कड़ाके की सर्दी या झुलसाने वाली गर्मी भी शरीर में थकान और अत्यधिक नींद पैदा कर सकती हैं।

कुल मिलाकर, दिन में बार-बार नींद आना एक साधारण समस्या भी हो सकती है- जैसे खराब स्लीप हाइजीन या रात की इंसफिशिएंट स्लीप, लेकिन साथ ही यह किसी बड़ी बीमारी जैसे- हीमोग्लोबिन की कमी, थायरॉइड, शुगर या स्लीप एपनिया का अलार्म भी हो सकता है। इसलिए, अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।

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