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118 जहाजों का रास्ता बदला, 5 को समुद्र में ही किया निष्क्रिय

ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की समुद्री नाकेबंदी लगातार सख्त होती जा रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की है कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाकर वाशिंगटन की सक्रिय नौसैनिक नाकाबंदी के तहत 118 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया और पांच जहाजों को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया।

दरअसल, अमेरिकी सेनाओं ने 13 अप्रैल को ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी शुरू की थी। CENTCOM ने रविवार को X पर एक पोस्ट में कहा, “US सेना ने 31 मई तक 118 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया है और 5 को रोक दिया है।”

इसे लागू करने के बाद, US सेंट्रल कमांड ने चेतावनी दी कि वे ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से आने वाले सभी जहाजों की आवाजाही को रोकना जारी रखेंगे।

राजनयिक मोर्चे पर भी बढ़ा सस्पेंस

समुद्र में जारी इस आक्रामक कार्रवाई के बीच राजनयिक मोर्चे पर भी सस्पेंस बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ ‘लगभग फाइनल’ हो चुके अंतरिम समझौते के ड्राफ्ट को दोबारा संशोधन के लिए भेज दिया है। जिससे कूटनीतिक प्रक्रिया लंबी हो गई है और टकराव को रोकने के प्रयासों में नई अनिश्चितता आ गई है।

CNN के अनुसार, ट्रंप ने सलाहकारों के साथ एक बैठक के दौरान ईरान की परमाणु प्रतिबद्धताओं पर सख्त प्रावधानों और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का अनुरोध किया। US राष्ट्रपति ने कथित तौर पर किसी भी समझौते के तहत तेहरान को दी जाने वाली वित्तीय राहत की सीमा पर भी चिंता व्यक्त की है, और ओबामा-युग के परमाणु समझौते के साथ तुलना से सावधान हैं, जिसकी उन्होंने बार-बार बहुत नरम होने के लिए आलोचना की है।

US अधिकारियों ने एक ऐसे समझौते की दिशा में प्रगति का संकेत दिया है जो लड़ाई को रोक देगा और होर्मुज को फिर से खोल देगा, साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे विस्तृत बातचीत की अनुमति देगा।

हालांकि, ट्रंप ने यह कहने के बावजूद भी शुक्रवार की बैठक के दौरान कहा कि अंतिम निर्णय लेंगे। लेकिन उससे पहले ट्रंप ने कुछ शर्ते बताते हुए कहा कि US ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को जब्त कर लेगा और उसे नष्ट कर देगा, हालांकि ईरान लगातार कहता रहा है कि वह मौजूदा बातचीत के तहत अपने परमाणु कार्यक्रम के विवरण पर चर्चा नहीं कर रहा है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि सौदे के हिस्से के तौर पर पैसे के लेन-देन पर कोई चर्चा नहीं हुई है, जबकि ईरान ने कहा है कि किसी भी समझौते में वित्तीय प्रावधान शामिल होने चाहिए। इन मतभेदों को कैसे सुलझाया जाएगा, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि सौदे की शब्दावली पर बातचीत जारी है।

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