भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: धारा 232 के तहत स्टील

भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा के बाद, सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 232 के अंतर्गत आने वाली वस्तुएं—जैसे स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और कुछ ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स—इस समझौते के मुख्य दायरे से बाहर रह सकती हैं।
वर्तमान में इन पर लगभग 50% (स्टील और एल्युमीनियम पर) और 25% (कुछ ऑटो पार्ट्स पर) टैरिफ लागू हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए हैं।
हालांकि, भारत को उम्मीद है कि भविष्य के चरणों में इन प्रावधानों के तहत रियायतें हासिल की जा सकेंगी। एक उच्च पदस्थ सरकारी सूत्र ने बताया, “धारा 232 के तहत लगे शुल्क फिलहाल जारी रहने की संभावना है, लेकिन भारत को बाद में कुछ राहत मिल सकती है।”
यह समझौता सोमवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर रहा है, साथ ही रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ को हटाया जा रहा है।
भारत ने रूसी तेल खरीद रोकने, अमेरिकी ऊर्जा, कोयला, तकनीक और अन्य उत्पादों की अधिक खरीद (कुल 500 अरब डॉलर तक की प्रतिबद्धता) और कुछ क्षेत्रों में शून्य टैरिफ देने पर सहमति जताई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह समझौता “भारत के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ सौदा” है, जो बांग्लादेश, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर है।
उन्होंने जोर दिया कि कृषि, डेयरी और संवेदनशील क्षेत्रों के हित सुरक्षित रखे गए हैं, जबकि श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, चमड़ा, आभूषण, मछली पालन और समुद्री उत्पादों को बड़ी राहत मिलेगी। गोयल ने कहा, “यह समझौता उच्च प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेगा।”
समझौते के तहत अगले 2-3 दिनों में संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद है, जिसमें विस्तृत रूपरेखा सामने आएगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बढ़ावा देगा, खासकर एशियाई प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में जहां टैरिफ 20-30% के आसपास हैं। हालांकि, धारा 232 जैसे मुद्दों पर तत्काल राहत न मिलने से स्टील और ऑटो सेक्टर में सुधार की प्रतीक्षा बनी रहेगी।

