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चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 1 नवंबर से गन्ने से बने एथेनॉल की खरीद पर रोक

1 नवंबर से गन्ने के रस और चीनी से बने एथेनॉल की खरीद बंद, जानें वजह

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और गन्ने के संभावित कम उत्पादन को देखते हुए सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने एथेनॉल खरीद की नीति में बड़ा बदलाव किया है। नए आपूर्ति वर्ष में 1 नवंबर 2026 से गन्ने के रस, चीनी और शुगर सिरप से बने एथेनॉल की खरीद नहीं की जाएगी। नए टेंडर में बी-हैवी मोलासेस यानी शीरे से तैयार एथेनॉल को भी बाहर रखा गया है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में बढ़ोतरी के दबाव को कम करना है।

1 नवंबर से लागू होंगे नए नियम

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), नुमालीगढ़ रिफाइनरी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए संयुक्त रूप से एथेनॉल खरीद का टेंडर जारी किया है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनियां 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 के बीच लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद की योजना बना रही हैं।

नई व्यवस्था में चीनी आधारित कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की खरीद शामिल नहीं होगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश में एथेनॉल उत्पादन या पेट्रोल में इसकी मिलावट बंद हो जाएगी। कंपनियां मक्का, टूटे चावल और अन्य अनुमत अनाज आधारित स्रोतों से एथेनॉल खरीद सकती हैं।

चीनी की कीमतें बढ़ने की क्या है वजह?

हाल के महीनों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कमजोर मानसून, प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका और त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग जैसे कारण बताए जा रहे हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने आगामी सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ाई है।

जब गन्ने का इस्तेमाल चीनी के बजाय एथेनॉल बनाने में होता है, तो बाजार के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा प्रभावित हो सकती है। नए फैसले के जरिए सरकार चीनी उत्पादन के लिए अधिक गन्ना उपलब्ध रखने और घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

हालांकि, सरकार पहले यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को केवल एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है। उत्पादन, मौसम, मांग और बाजार में उपलब्ध स्टॉक जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं।

क्या 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य पर पड़ेगा असर?

सरकार के सामने चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के साथ पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य को जारी रखने की चुनौती भी है। नई खरीद नीति में अनाज आधारित एथेनॉल के विकल्प खुले रखे गए हैं, ताकि ईंधन की जरूरत पूरी करने के लिए केवल गन्ने पर निर्भर न रहना पड़े।

मक्का और टूटे चावल जैसे अनाज से एथेनॉल बनाया जा सकता है। इससे तेल कंपनियों को वैकल्पिक स्रोत मिलते हैं और गन्ने से बनने वाली चीनी को खाद्य बाजार के लिए सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, लक्ष्य पूरा करने की वास्तविक क्षमता अनाज की उपलब्धता, उत्पादन लागत और एथेनॉल की आपूर्ति पर भी निर्भर करेगी।

चीनी मिलों और किसानों पर क्या होगा असर?

इस फैसले से चीनी मिलों को गन्ने का अधिक हिस्सा चीनी उत्पादन में लगाने की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर, वे मिलें जो एथेनॉल उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित करती हैं, उन्हें अपने उत्पादन और बिक्री की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्रों के लिए मांग बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।

किसानों के लिए इसका असर गन्ने की पैदावार, चीनी मिलों की जरूरत और गन्ने के भुगतान से जुड़े नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए तत्काल किसी बड़े लाभ या नुकसान का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

निष्कर्ष: 1 नवंबर से लागू होने वाली नई एथेनॉल खरीद नीति का मकसद चीनी की घरेलू उपलब्धता को मजबूत करना है। साथ ही मक्का और अन्य अनुमत अनाज से एथेनॉल खरीदकर पेट्रोल में मिश्रण की व्यवस्था जारी रखने की योजना है। चीनी की कीमतों और E20 लक्ष्य पर इसका वास्तविक असर नए सीजन के उत्पादन और आपूर्ति के आंकड़े सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।

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