Goldman Sachs की चेतावनी से शेयर बाजार में बढ़ी चिंता! ₹86,400 करोड़ की अतिरिक्त बिकवाली का दावा, जानें बाजार पर कितना दबाव
शेयर बाजार में ₹86,400 करोड़ की बिकवाली का दावा, जानें पूरी खबर

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच गोल्डमैन सैक्स की बिकवाली संबंधी रिपोर्ट को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने बाजार पर दबाव बनाया है। हालांकि, रिपोर्ट के नाम पर प्रसारित ₹86,400 करोड़ की अतिरिक्त बिकवाली के सटीक आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। गोल्डमैन सैक्स की हालिया बाजार संबंधी टिप्पणियों में संभावित बिकवाली के जोखिम और निवेशकों की सतर्क स्थिति का उल्लेख जरूर है।
अमेरिकी पेंशन फंड बेच सकते हैं शेयर
30 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स के ट्रेडिंग डेस्क ने अनुमान जताया था कि सितंबर के अंत में अमेरिकी पेंशन फंड लगभग 33 अरब डॉलर के शेयर बेच सकते हैं। यह बिक्री उसके ऐतिहासिक आंकड़ों के 98वें पर्सेंटाइल में थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स (CTA) बाजार स्थिर रहने पर दुनियाभर में लगभग 11.5 अरब डॉलर के शेयर खरीद सकते हैं। लेकिन बाजार गिरने पर उनकी संभावित रणनीति करीब 15.8 अरब डॉलर की बिकवाली की हो सकती है। ये परिस्थितियों पर आधारित अनुमान हैं, निश्चित बिक्री के आंकड़े नहीं।
भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली
भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है। इकोनॉमिक टाइम्स की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के पहले छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से ₹45,125 करोड़ की शुद्ध निकासी की। सितंबर में पूरे महीने की निकासी ₹45,536 करोड़ रही थी। इस तेजी से बढ़ती बिकवाली के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख कारण बताए गए हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी पर क्यों बना है दबाव?
विदेशी निवेशकों के शेयर बेचने से बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न मिलता है, तो कुछ निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित या बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की तरफ रुख करते हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, भारतीय बाजार ने हाल ही में आठ सप्ताह की लगातार गिरावट का रिकॉर्ड दर्ज किया था। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।

क्या बाजार में और गिरावट आएगी?
गिरावट की आशंका के बावजूद यह कहना सही नहीं होगा कि बाजार निश्चित रूप से और नीचे जाएगा। 5 अक्टूबर को प्रकाशित गोल्डमैन सैक्स के भारत संबंधी विश्लेषण के सारांश में जून 2027 तक निफ्टी के लिए 26,500 का लक्ष्य और भारतीय शेयरों पर Marketweight रुख बताया गया था। इसका अर्थ है कि ₹86,400 करोड़ की कथित अतिरिक्त बिकवाली को गोल्डमैन सैक्स की भारत के बाजार पर निश्चित भविष्यवाणी मानना उचित नहीं है।
फिलहाल निवेशकों की नजर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेश का फैसला केवल किसी एक रिपोर्ट या बिकवाली के अनुमान के आधार पर नहीं लेना चाहिए।




