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13 साल की अरिका कुंडू का कमाल! मूंगफली के छिलकों से फलों-सब्जियों से हटाएंगी कीटनाशक, 3M Young Scientist Challenge में बनीं फाइनलिस्ट

13 साल की अरिका कुंडू का कमाल! मूंगफली के छिलकों से हटाएंगी फलों-सब्जियों के कीटनाशक, 3M Challenge में फाइनलिस्ट

नई दिल्ली/मिनेसोटा। भारतीय मूल की महज 13 वर्षीय छात्रा अरिका कुंडू ने विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में ऐसा इनोवेशन तैयार किया है, जिसने अमेरिका में उनका नाम सुर्खियों में ला दिया है। मिनेसोटा की Minnetonka Middle School East में पढ़ने वाली अरिका ने कृषि से निकलने वाले कचरे, खासकर मूंगफली के छिलकों, का इस्तेमाल करके फलों और सब्जियों पर मौजूद कीटनाशक अवशेषों को हटाने की एक नई तकनीक विकसित की है। उनके प्रोजेक्ट LIGNEX को 2026 के प्रतिष्ठित 3M Young Scientist Challenge के टॉप-10 फाइनलिस्ट प्रोजेक्ट्स में जगह मिली है।

मूंगफली के छिलके से निकाला वैज्ञानिक समाधान

अरिका के प्रोजेक्ट का पूरा नाम “LIGNEX – A Novel Biosorption Based Approach that Uses Agricultural Waste Material to Eliminate Pesticide Residues from Fresh Produce” है। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने कृषि से निकलने वाले बेकार पदार्थों को उपयोगी सामग्री में बदलने की कोशिश की है। 3M Young Scientist Lab के अनुसार, अरिका ने मूंगफली के छिलकों जैसे कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल कर ताजा फलों और सब्जियों से कीटनाशक अवशेष हटाने की एक विधि तैयार की है।

यानी जिस मूंगफली के छिलके को आमतौर पर कचरा समझकर फेंक दिया जाता है, अरिका ने उसी को एक संभावित फूड-सेफ्टी और पर्यावरणीय समाधान के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता खोजा है।


कैसे काम करता है अरिका का LIGNEX प्रोजेक्ट?

अरिका का तरीका biosorption की अवधारणा पर आधारित है। आसान भाषा में समझें तो कुछ प्राकृतिक पदार्थ अपनी सतह पर मौजूद दूसरे पदार्थों को बांधने या सोखने की क्षमता रखते हैं।

अरिका ने इसी वैज्ञानिक सिद्धांत को कृषि अपशिष्ट के साथ जोड़कर यह देखने की कोशिश की कि मूंगफली के छिलकों से तैयार सामग्री फलों और सब्जियों की सतह पर मौजूद कीटनाशक अवशेषों को कम करने में कितनी प्रभावी हो सकती है।

यह प्रोजेक्ट खास इसलिए है क्योंकि इसमें एक साथ दो समस्याओं को संबोधित करने की कोशिश की गई है—कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल और फूड सेफ्टी


फलों-सब्जियों पर कीटनाशक अवशेष क्यों चिंता का विषय हैं?

खेती में कीटों और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों से बचाव के लिए अलग-अलग प्रकार के कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका सही और निर्धारित तरीके से उपयोग जरूरी है।

फलों और सब्जियों की सतह पर अगर कीटनाशक अवशेष रह जाएं तो उपभोक्ताओं के लिए यह खाद्य सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन सकता है। इसी वजह से फल-सब्जियों की सफाई और उन पर मौजूद अवशेषों को कम करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

अरिका का प्रोजेक्ट इसी समस्या के लिए एक सस्टेनेबल और कम लागत वाले संभावित समाधान की दिशा में काम करता है।


कचरे को बनाया उपयोगी संसाधन

LIGNEX की सबसे खास बात इसका सस्टेनेबल एंगल है।

मूंगफली के छिलके जैसे कृषि अवशेष अक्सर बेकार समझे जाते हैं। अगर ऐसे अपशिष्ट को किसी उपयोगी तकनीक में बदला जा सके तो इससे कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ नई पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा मिल सकता है।

अरिका का प्रोजेक्ट इसी सोच को आगे बढ़ाता है—कृषि कचरे को समस्या नहीं बल्कि संसाधन के तौर पर देखना। 3M Young Scientist Lab भी उनके प्रोजेक्ट को कृषि अपशिष्ट और सरल उपकरणों के जरिए सुरक्षित भोजन को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में इनोवेशन के तौर पर प्रस्तुत करता है।


अमेरिका की प्रतिष्ठित साइंस प्रतियोगिता में जगह

अरिका कुंडू को 2026 के 3M Young Scientist Challenge के टॉप-10 फाइनलिस्टों में चुना गया है। इस प्रतियोगिता में अमेरिका के मिडिल स्कूल के छात्र वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित का इस्तेमाल करते हुए अपने प्रोजेक्ट पेश करते हैं।

2026 में चुने गए फाइनलिस्टों की उम्र 11 से 14 वर्ष के बीच है। फाइनलिस्टों को अपने प्रोजेक्ट को और बेहतर बनाने के लिए 3M के वैज्ञानिकों के साथ मेंटरशिप भी मिलेगी।


अब अरिका के सामने अगली बड़ी चुनौती

फाइनलिस्ट चुने जाने के बाद अरिका को अपने प्रोजेक्ट को और विकसित करने का मौका मिलेगा। उन्हें 3M के वैज्ञानिक मेंटर्स के साथ काम करना है, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रोजेक्ट की प्रस्तुति होगी।

राष्ट्रीय फाइनल 12 और 13 अक्टूबर 2026 को सेंट पॉल, मिनेसोटा स्थित 3M Innovation Center में होने हैं। प्रतियोगिता में लाइव STEM चुनौतियां और प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन शामिल होंगे। विजेता को $25,000 का ग्रैंड प्राइज और “America’s Top Young Scientist” का खिताब मिलेगा।


अरिका समेत 5 भारतीय-अमेरिकी छात्र फाइनलिस्ट

2026 की प्रतियोगिता में अरिका अकेली भारतीय मूल की छात्रा नहीं हैं। कुल 10 फाइनलिस्टों में 5 भारतीय-अमेरिकी छात्र शामिल हैं। इनमें अरिका कुंडू के अलावा Aaisha Asif, Raji Doshi, Sharvi Mahajan और Naboshree Santra शामिल हैं।

इन छात्रों के प्रोजेक्ट अलग-अलग समस्याओं से जुड़े हैं—कहीं पर्यावरण संरक्षण, कहीं स्वास्थ्य सुरक्षा तो कहीं कृषि और तकनीक से जुड़े समाधान तलाशे गए हैं।


अरिका की उपलब्धि क्यों खास है?

अरिका की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इतनी कम उम्र में ऐसी समस्या पर काम किया है जिसका संबंध सीधे खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन से है।

उनका प्रोजेक्ट दिखाता है कि वैज्ञानिक सोच के लिए उम्र सबसे बड़ी बाधा नहीं है। सही सवाल, प्रयोग करने की इच्छा और समस्या का नया समाधान खोजने की कोशिश एक स्कूली छात्र को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंच तक पहुंचा सकती है।


भारतवंशी युवाओं की बढ़ती वैज्ञानिक पहचान

अरिका की सफलता भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए भी गर्व की बात है। 3M Young Scientist Challenge में भारतीय मूल के छात्रों की मौजूदगी लगातार चर्चा में रही है। 2026 में 10 फाइनलिस्टों में से आधे भारतीय-अमेरिकी छात्रों का होना इस बात को रेखांकित करता है कि युवा भारतीय-अमेरिकी छात्र STEM क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं।


निष्कर्ष

13 साल की अरिका कुंडू का LIGNEX प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि विज्ञान और इनोवेशन की शुरुआत छोटी उम्र में भी बड़े सवालों से की जा सकती है। मूंगफली के छिलकों जैसे कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल करके फलों और सब्जियों से कीटनाशक अवशेष कम करने की उनकी कोशिश को अमेरिका के 2026 3M Young Scientist Challenge में टॉप-10 फाइनलिस्टों में जगह मिली है।

अब अरिका को 3M के वैज्ञानिकों के साथ अपने प्रोजेक्ट को और विकसित करने का अवसर मिलेगा। अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रीय फाइनल में अगर उनका प्रोजेक्ट विजेता बनता है, तो उन्हें $25,000 का पुरस्कार और America’s Top Young Scientist का खिताब मिलेगा।

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