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शरीर में दिखने वाले ये 4 लक्षण करते हैं सर्वाइकल कैंसर का इशारा

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने सबसे कॉमन कैंसर में से एक है। हर साल इस खतरनाक बीमारी के कारण लाखों महिलाएं अपनी जान गंवाती हैं। वक्त रहते इसकी पहचान न कर पाना, इसे और भी ज्यादा खतरनाक बनाता है। इसलिए इस बीमारी के लक्षणों (Symptoms of Cervical Cancer) के बारे में जानना जरूरी है।

दरअसल, सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती स्टेज में अक्सर इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, शरीर में कई बदलाव दिखने लगते हैं। समय रहते लक्षणों (Warning Signs of Cervical Cancer) की पहचान और बचाव के तरीकों को अपनाकर इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानें सर्वाइकल कैंसर के लक्षण, रिस्क फैक्टर और बचाव के तरीके।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण कैसे होते हैं?
सर्वाइकल कैंसर की शुरुआत में कोई खास संकेत महसूस नहीं होते, लेकिन कैंसर बढ़ने पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

असामान्य ब्लीडिंग- सेक्स के बाद, दो पीरियड्स के बीच के समय में, या मेनोपॉज के बाद वेजाइना से ब्लीडिंग होना इसके मुख्य लक्षणों में से एक है।
पीरियड साइकिल में बदलाव- पीरियड्स के दौरान सामान्य से ज्यादा ब्लीडिंग होना या पीरियड्स का सामान्य अवधि से ज्यादा दिनों तक चलना।
असामान्य डिस्चार्ज- वेजाइना से पानी जैसा या खून वाला डिस्चार्ज होना, जिसमें से दुर्गंध भी आ सकती है।
दर्द- पेल्विक एरिया में दर्द होना या शारीरिक संबंध बनाने के दौरान दर्द महसूस होना।

सर्वाइकल कैंसर के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?
HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) इन्फेक्शन इसका मुख्य कारण होता है, जिसका रिस्क कई कारणों से बढ़ सकता है-

तंबाकू और स्मोकिंग- स्मोक करने वाली महिलाओं में HPV इन्फेक्शन लंबे समय तक बना रहता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
सेक्स पार्टनर्स की संख्या- एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर्स होने या आपके पार्टनर के कई पार्टनर्स होने से HPV इन्फेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
कम उम्र में सेक्शुअली एक्टिव होना- कम उम्र में शारीरिक संबंध बनाने से HPV का जोखिम बढ़ता है।
सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (STIs)- हर्पीज, क्लैमिडिया, गोनोरिया और HIV/AIDS जैसे इन्फेक्शन HPV के खतरे को और बढ़ा देते हैं।
कमजोर इम्युनिटी- अगर किसी अन्य बीमारी के कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर है, तो HPV इन्फेक्शन कैंसर में बदलने की संभावना ज्यादा होती है।

बचाव के लिए क्या करें?
HPV वैक्सीन- अपने डॉक्टर से HPV वैक्सीन के बारे में सलाह लें। यह टीका इस कैंसर के जोखिम को काफी कम कर सकता है।
नियमित पैप टेस्ट- 21 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से पैप टेस्ट करवाएं। यह टेस्ट कैंसर होने से पहले की स्थितियों का पता लगा सकता है, जिनका समय पर इलाज संभव है।
सुरक्षित यौन संबंध- कंडोम का इस्तेमाल करें और एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर न रखें, ताकि इन्फेक्शन का खतरा कम हो।
स्मोकिंग छोड़ें- अगर आप स्मोक करते हैं, तो इसे छोड़ने के लिए डॉक्टरी सहायता लें।

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