Festive Sale 2026 : दो दिनों में ऑनलाइन बाजार में मची हलचल, आंकड़े देखकर चौंक जाएंगे

भारत में अक्टूबर 2026 की त्योहारी ऑनलाइन सेल के शुरुआती दो दिनों में खरीदारी का बड़ा रिकॉर्ड देखने को मिला। अनुमान के मुताबिक, इस दौरान देश में करीब 24,200 करोड़ रुपये का सामान ऑनलाइन बेचा गया। Amazon, Flipkart, Meesho और Ajio जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर करोड़ों ग्राहकों ने खरीदारी की। इन दो दिनों में लगभग 6 से 6.5 करोड़ खरीदारों ने 8 से 9 करोड़ ऑर्डर दिए। यह आंकड़ा त्योहारों के दौरान ऑनलाइन बाजार की बढ़ती लोकप्रियता और ग्राहकों की खरीदारी में बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।
Redseer Strategy Consultants के अनुमान के अनुसार, त्योहारी सेल के शुरुआती दिनों में मोबाइल फोन की बिक्री सबसे प्रमुख श्रेणियों में शामिल रही। वहीं, कपड़े और फैशन से जुड़े उत्पादों की मांग में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इतनी बड़ी रकम की खरीदारी के पीछे सिर्फ छूट और आकर्षक ऑफर ही नहीं, बल्कि लोगों की आर्थिक प्राथमिकताओं और खर्च करने के तरीकों की भी अहम भूमिका होती है।
मोबाइल फोन की खरीदारी पर सबसे ज्यादा खर्च
ऑनलाइन सेल के शुरुआती दो दिनों में मोबाइल फोन की बिक्री करीब 9,100 करोड़ से 9,600 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। यह कुल बिक्री का लगभग 38 से 40 प्रतिशत हिस्सा है। इससे पता चलता है कि स्मार्टफोन त्योहारी खरीदारी के प्रमुख उत्पादों में बने हुए हैं।
ग्राहक नई तकनीक, बेहतर कैमरा, ज्यादा स्टोरेज और पुराने फोन को बदलने के लिए इस दौरान खरीदारी करते हैं। कई ई-कॉमर्स कंपनियां बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और आसान किस्तों जैसी सुविधाएं भी देती हैं। इन विकल्पों से महंगे फोन खरीदना कुछ ग्राहकों के लिए आसान हो जाता है।
फैशन की बिक्री में भी आई तेजी
मोबाइल फोन के बाद फैशन से जुड़े उत्पादों ने भी ऑनलाइन बाजार में अच्छी जगह बनाई। कपड़े, जूते और अन्य फैशन उत्पादों की बिक्री लगभग 3,630 करोड़ से 4,350 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। पिछले साल की समान शुरुआती अवधि के मुकाबले इस श्रेणी में करीब 22 से 25 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है।
त्योहारों में नए कपड़े खरीदने, परिवार के लिए सामान लेने और विशेष अवसरों पर खरीदारी करने की परंपरा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए कारोबार बढ़ाने का अवसर बनती है। इसके अलावा, घर बैठे कई ब्रांड और कीमतों की तुलना करने की सुविधा भी ग्राहकों को आकर्षित करती है।
आखिर इतनी खरीदारी के लिए पैसा कहां से आता है?
करोड़ों रुपये की खरीदारी के आंकड़े एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करते हैं कि ग्राहक इस खर्च के लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करते हैं। कुछ लोग पहले से बचत करते हैं, जबकि कुछ अपने दूसरे खर्चों में कटौती करके खरीदारी के लिए बजट बनाते हैं। वहीं, कुछ ग्राहक क्रेडिट कार्ड, ईएमआई या अन्य भुगतान विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि ग्राहकों ने कितनी खरीदारी बचत से की और कितनी उधार या किस्तों के माध्यम से। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इतनी बड़ी बिक्री का अधिकांश हिस्सा कर्ज के जरिए हुआ है।
खरीदारी में छिपा है अर्थशास्त्र का अहम सिद्धांत
अर्थशास्त्र में किसी चीज पर पैसा खर्च करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण विचार को ‘अवसर लागत’ कहा जाता है। इसका अर्थ है कि एक विकल्प चुनने पर हमें दूसरे सबसे अच्छे विकल्प को छोड़ना पड़ सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति 30,000 रुपये का स्मार्टफोन खरीदता है, तो वह रकम अब बचत, शिक्षा, यात्रा या किसी अन्य जरूरत के लिए उपलब्ध नहीं रहती। अगर फोन किस्तों पर खरीदा गया है, तो भविष्य की आमदनी का एक हिस्सा किस्त चुकाने में खर्च होगा।
इसका मतलब यह नहीं है कि महंगी खरीदारी करना गलत है। असल सवाल यह है कि खरीदारी व्यक्ति की जरूरतों, बजट और भविष्य की आर्थिक योजनाओं के अनुरूप है या नहीं।
खर्च करने की प्राथमिकताएं भी बताती हैं बहुत कुछ

त्योहारी सेल में हुई भारी खरीदारी यह दिखाती है कि ऑनलाइन बाजार भारतीय ग्राहकों के लिए कितना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। लेकिन खर्च के आंकड़ों को समझते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर व्यक्ति की आमदनी, जरूरतें और आर्थिक परिस्थितियां अलग होती हैं।
किसी के लिए नया मोबाइल काम की जरूरत हो सकता है, तो किसी दूसरे के लिए वही केवल एक अतिरिक्त सुविधा। इसी तरह, एक परिवार त्योहारों की खरीदारी के लिए महीनों बचत करता है, जबकि दूसरा अपने खर्चों को सीमित रखता है।
आखिरकार, आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला वही है जिसमें खरीदारी की खुशी के साथ जरूरी खर्चों, बचत और भविष्य की जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखा जाए।




