Maritime Security : 40 हजार करोड़ रुपये की तैयारी, भारतीय नौसेना के नए प्लान ने सबको चौंकाया!
भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी, ₹40,000 करोड़ से बनेंगे 8 आधुनिक स्टील्थ युद्धपोत; जानिए इनकी खासियत

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने नौसेना के लिए 8 अगली पीढ़ी के आधुनिक युद्धपोत बनाने की ₹40,000 करोड़ से अधिक की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इन युद्धपोतों को अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी स्टील्थ डिजाइन के आधार पर तैयार किया जाएगा। इस परियोजना से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में मिली परियोजना को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार, 28 अक्टूबर को इस महत्वपूर्ण रक्षा परियोजना को मंजूरी दी। इसके तहत भारतीय नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (Next Generation Corvettes) बनाए जाएंगे।
इन युद्धपोतों के निर्माण की जिम्मेदारी देश के दो प्रमुख सरकारी शिपयार्ड को मिलने की उम्मीद है। इनमें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों के मुताबिक, दोनों कंपनियों के साथ औपचारिक अनुबंध पर आने वाले दिनों में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
2,000 टन वजन और 30 नॉट की रफ्तार
नई पीढ़ी के ये युद्धपोत आकार में अपेक्षाकृत छोटे, लेकिन परिचालन क्षमता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे। प्रत्येक युद्धपोत का वजन लगभग 2,000 टन होने का अनुमान है। इनकी अधिकतम गति करीब 30 नॉट बताई गई है।
इन जहाजों को भारतीय नौसेना द्वारा विकसित नए स्वदेशी स्टील्थ डिजाइन के आधार पर तैयार किया जाएगा। स्टील्थ तकनीक का उद्देश्य जहाज की रडार पर पहचान होने की संभावना को कम करना है। इससे समुद्री अभियानों के दौरान इन युद्धपोतों को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
इनमें आधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियों को शामिल किए जाने की योजना है। हालांकि, इनके सभी हथियारों, सेंसरों और अन्य तकनीकी उपकरणों का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है।
दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों पर रखेंगे नजर
नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट को कई तरह के समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया जाएगा। इनकी संभावित भूमिकाओं में दुश्मन के सतही युद्धपोतों के खिलाफ कार्रवाई, पनडुब्बी रोधी अभियान और हवाई खतरों से निपटने में सहायता शामिल है।
इसके अलावा, ये युद्धपोत तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी, गश्त और खोज एवं बचाव अभियानों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका अहम हो सकती है।
स्वदेशी निर्माण से रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल का लक्ष्य बताया गया है। सभी आठ युद्धपोत भारत में ही बनाए जाएंगे। इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
इस परियोजना से दोनों शिपयार्ड को लंबे समय तक काम मिलने और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी छोटी-बड़ी कंपनियों में रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।
2030 तक मिल सकता है पहला युद्धपोत

रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय नौसेना को पहला युद्धपोत वर्ष 2030 तक सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण प्रक्रिया को तेज करने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक समयसीमा औपचारिक अनुबंध और निर्माण की प्रगति पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, ₹40,000 करोड़ से अधिक की यह परियोजना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आठ नए युद्धपोतों के शामिल होने से भारत की समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।



